बहराइच में नालों पर सज रही दुकानें, कैसे हो साफ सफाई

बहराइच,(उत्तर प्रदेश)। पालिका प्रशासन की उदासीनता से शहर की जलनिकासी व्यवस्था को दुरुस्त बनाने के लिए बने नाले अतिक्रमण की चपेट में हैं। इनमें से 18 प्रमुख नालों पर 40 फीसदी तक कब्जा कर दुकानें तक सजा ली गयी हैं। रसूखदारों व दुकानदारों के अवैध कब्जे में फंसे इन नालों की साफ सफाई न हो पाने से ही शहर में जलभराव की समस्या सबकी सिरदर्दी बढ़ा रही है। नालों के चोक होने से बरसात में एक बार फिर मुख्य बाजार समेत शहर के कई अन्य प्रमुख इलाकों में जलभराव बड़ी परेशानी बनेगा।
शहर की जलनिकासी व्यवस्था 41 बड़े, छोटे व मझोले नालों के सहारे होती है। प्रशासनिक उदासीनता के चलते इन नालों पर व्याप्त अतिक्रमण नालों की साफ सफाई में बड़ा अड़ंगा लगा रहा है। शहर का सबसे पुराना नाला फायर स्टेशन के सामने से गुजरता हुआ घंटाघर तक जाता है। इस नाले पर बीते लंबे समय से दुकानदारों का कब्जा होने से, नाला पूरी तरह से बंद है। नाला बंद हो जाने के कारण ही महज कुछ देर की बारिश में शहर के मुख्य मार्ग पर घंटो जलभराव की समस्या व्याप्त रहती है।
इसके साथ ही अन्य इलाकों व बाजारों में बने नाले नालियों पर भी लोगों ने सीढ़ी व चबूतरा बनाकर कब्जा कर लिया है। इस कारण नालों की साफ सफाई न हो पाने से बरसात के दिनों में जलभराव की दिक्कत सभी को परेशान करती है। हालांकि बरसात से पूर्व पालिका प्रशासन प्रत्येक वर्ष शहर में जलनिकासी को लेकर लाखों खर्च कर नाला सफाई अभियान भी चलाता है। लेकिन अतिक्रमण के कारण नालों की सफाई सिर्फ कागजों पर ही पूरी हो जाती है।
40 फीसदी नालों पर है अतिक्रमण
शहर में पालिका प्रशासन की ओर से आठ बड़े, 15 मझोले व 18 छाटे नाले, नालियों का इंतजाम शहर की जलनिकासी के लिए कर रखा है। इसमें से 16 ऐसे नाले है कि जिसके 40 फीसदी हिस्सों अतिक्रमण है। जानकारों की मानें तो इनमें से 50 से अधिक मकान ऐसे बनें हैं, जिनकी बाउंड्रीवाल नाले के बाहर तक हैं। इसके अलावा नगर पालिका से पीपल चौराहे व चौक बाजार तक करीब दो सौ दुकानों की सीढिय़ां और छज्जे नालों के ऊपर निर्मित हैं। वहीं शहर की सकरी गलियों में काफी संख्या में ऐसे मकान बनें हैं, जिनका छोटी नालियों पर कब्जा है। ऐसे में पालिका प्रशासन का सफाई अभियान धरातल पर नहीं उतर रहा है।




