गरीब बच्चों की जिंदगी को पढ़ाई से बदल रहे गाजियाबाद के बिश्वजीत झा, ‘बुक दादा’ के नाम से फेमस

गाजियाबाद ब्यूरो। जिन बच्चों को समय पर पढ़ाई नहीं मिली और जिन्हें अनाथ छोड़ दिया गया। ऐसे बच्चों की जिंदगी को विश्वजीत झा पढ़ाई के माध्यम से बदल रहे हैं। इसके लिए शहर में काम भी कर रहे हैं। बिश्वजीत झा के जीवन की शुरुआत भले ही दार्जिलिंग से हुई हो, लेकिन वो अपनी पत्नी डॉ. संजुक्ता साहा के साथ जलपाईगुड़ी जिले के राजगंज के पास काफी काम कर रहे हैं। बिश्वजीत झा इंग्लिश की पढ़ाई बच्चों को देने में लगे हुए हैं। स्थानीय लोग बिश्वजीत झा को एक और नाम से जानते हैं और वह है ‘बुक दादा’। अंग्रेजी पढ़ने-लिखने के लिए संघर्ष करने वाले एक युवा छात्र से लेकर पश्चिम बंगाल के वंचित बच्चों के लिए एक रक्षक बने हुए हैं। बिश्वजीत झा उन हजारों वंचित बच्चों के लिए आशा की किरण बन चुके हैं, जो शिक्षा के माध्यम से अपने भाग्य को बदलने का लक्ष्य रखते हैं।

बिश्वजीत झा आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों के लिए काम कर रहे हैं। गाजियाबाद के इंदिरापुरम में अपने घर पर बिश्वजीत ने कहा कि जब कोविड आपदा ने पूरी दुनिया को अपंग बना दिया था, तब ग्रामीण क्षेत्रों की शिक्षा में खतरनाक गिरावट आई थी। हमें एक छोटी बच्ची के बारे में पता चला, जो अपनी पढ़ाई छोड़ने के बारे में सोच रही थी, क्योंकि उसके परिवार को अपने बीमार पिता के इलाज के लिए पैसों की जरूरत थी। उस दौरान मैं और मेरी पत्नी संजुक्ता उसके घर गए और उसके परिवार से बात की कि हम उसकी पढ़ाई का ध्यान रखेंगे। बच्ची अब अच्छी तरह से पढ़ती है और हाल ही में अपनी कक्षा में पहली रैंक हासिल की है।
उन्होंने ने कहा कि मैं तहे दिल से प्रार्थना करता हूं कि किसी भी बच्चे को किसी भी परिस्थिति में अपनी पढ़ाई नहीं रोकनी चाहिए। साथ ही मेरा मानना है कि बच्चों को खेलों के प्रति भी जागरूक होना चाहिए। इसी से मुझे फुटबॉल प्रशिक्षण अकादमी शुरू करने की प्रेरणा मिली। फुटबॉल प्रशिक्षण अकादमी संस्थान ने मनोज मोहम्मद जैसी राष्ट्रीय प्रतिभाएं पैदा की हैं, जो वर्तमान में आईएसएल चैंपियन हैदराबाद एफसी के लिए खेल रहे हैं और कल्पना रॉय, जिन्होंने महिला फुटबॉल में अंडर-19 स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व किया है।

बिश्वजीत झा का कहना है कि मेरा और करीमुल का परिचय महज एक संयोग नहीं था। करीमुल बाइक ऐंबुलेंस सेवा से जरूरतमंदों की मदद करते हैं। मैंने सोचा अगर सीमित साधनों वाला व्यक्ति समाज के लाभ के लिए ऐसा कर सकता है तो मुझे क्या रोक रहा है? करीमुल से उनकी मुलाकात ने बिश्वजीत को वंचित बच्चों की मदद करने के अपने जुनून को पूरा करने के लिए प्रेरित किया। बिश्वजीत ने आगे कहा कि जब मैं वंचित बच्चों को शिक्षा प्राप्त करने के बजाय अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए छोटे-मोटे काम करते देखता था तो मुझे बहुत दुख होता था। इन दृश्यों ने मुझे शब्दों से परे निराश किया। अगर वे शिक्षा से मुंह मोड़ते रहे तो उनके परिवार गरीबी और अशिक्षा के अंतहीन चक्र में फंस जाएंगे और यही कारण है कि मैं अपने गृहनगर में पहला शिक्षा केंद्र खोलने के लिए प्रेरित हुआ। एक शब्दकोश की मदद से खुद को अंग्रेजी सिखाई और आज उन्होंने दो बेस्टसेलिंग उपन्यास लिखे हैं। उनका कहना है कि यह जानकर बहुत अच्छा लगा कि इंदिरा नूई के साथ मेरी पुस्तक, “बाइक ऐंबुलेंस दादा” को 2021 की सबसे प्रेरक पुस्तकों में से एक के रूप में चुना गया। मुझे खुशी है कि पुस्तक जल्द ही बॉलीवुड बायोपिक में बदल जाएगी। बिश्वजीत ने दो प्रसिद्ध पुस्तकें लिखी हैं और उनकी दूसरी पुस्तक का नाम “मॉडर्न बुद्धा” है।

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