दिल्ली नगर निगम के स्वामी दयानंद हॉस्पिटल में स्टाफ कम होने को लेकर नर्सिंग स्टाफ ने किया प्रदर्शन

राजीव कुमार गौड़/दिल्ली ब्यूरो। उत्तर पूर्वी दिल्ली दिलशाद गार्डन स्थित दिल्ली नगर निगम के सबसे बड़े अस्पताल स्वामी दयानंद हॉस्पिटल में गुरुवार को नर्सिंग स्टाफ ने स्टाफ कम होने को लेकर सुबह 10:00 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन किया। जिसके लिए प्रशासन को पहले से ही अवगत करा दिया गया था। स्वामी दयानंद अस्पताल गत कई वर्षों से नर्सिंग स्टाफ की कमी के कारण होने वाली परेशानियों से जूझ रहा है। वर्ष 2014 में कुल 187 स्टाफ की सेंशन पद थे। उसके बाद पूरे एमसीएच ब्लॉक का निर्माण हुआ इसके लिए कोई नई नियुक्ति नहीं की गईं और न ही नया पोस्ट क्रिएशन हुआ। इन्हीं मौजूदा स्टाफ से नई बिल्डिंग मैं कार्य किया जा रहा है। प्रोटोकॉल और नॉर्म्स के हिसाब से 400 स्टाफ की अस्पताल में जरूरत है लेकिन फिलहाल अस्पताल में 120 नर्सिंग स्टाफ ही काम कर रहे हैं। सीनियर नर्सिंग ऑफिसर के 59 पद में से केवल एक सीनियर नर्सिंग ऑफिसर का ही पद भरा हुआ है। इस वजह से सही तरीके से मरीजो की तीमारदारी नहीं हो पा रही है। इतना ही नहीं स्टाफ को मजबूरी में डबल शिफ्ट करनी पड़ती है जिसके कारण उनकी भी तबियत बिगड़ती है और स्टाफ अपनी मेडिकल लीव तक नहीं ले पाते।
प्रशासन को कई बार इस बारे में अवगत भी कर दिया गया है ,लेकिन प्रशासन की तरफ से केवल आश्वासन ही मिलते हैं और धरातल पर कोई काम हुआ ही नहीं है ।इस अवसर पर नर्सिंग वेलफेयर यूनियन के अध्यक्ष पुनीत उपाध्याय एवं नम्रता जी, जींस प्रीती ,पिंकी सागर सुनील, यशवंत, तेजपाल और समस्त नर्सिंग ऑफिसर उपस्थित थे। नर्सिंग वेलफेयर के ध्यक्ष पुनीत उपाध्याय ने कहा कि हम समस्त नर्सिंग स्टाफ इस प्रदर्शन के माध्यम से स्वामी दयानंद हॉस्पिटल प्रशासन को अवगत कराना चाहते हैं कि यदि यह समस्या जल्दी से जल्दी समाप्त नहीं की गईं तो आगे भी अनिश्चितकाल तक के लिए हम अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे और इसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
1952 से संचालित यह अस्पताल अपनी क्षमता से अधिक मरीजों का इलाज कर रहा है। यहां रोजाना हजारों मरीज आते हैं जो हिंदू राव अस्पताल से भी अधिक है। वर्तमान में नर्सिंग स्टाफ की कमी होने से मरीजों और उनके परिजनों को असुविधा होती है। स्टाफ की कमी के कारण मौजूदा नर्सिंग अधिकारियों पर काम का अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिससे वे तनाव में रहते हैं। स्टाफ कम होने से मरीजों की देखभाल की गुणवत्ता प्रभावित होती है, जिससे त्रुटियां और मृत्यु दर बढ़ने का जोखिम रहता है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button