‘अब टॉर्चर सहन नहीं होता, जान दे रहा हूं’,बाड़मेर में साधु ने गौशाला में फंदा लगाकर की आत्महत्या

  • बाड़मेर में साधु दयालपुरी ने गौशाला में फंदा लगाकर की आत्महत्या
  • आत्महत्या से पहले साधु दयालपुरी ने बनाया वीडियो, बताए तीन लोगों के नाम
  • पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया, जांच शुरू

बाड़मेर,(राजस्थान)। बाड़मेर की गोशाला में एक साधु ने फंदा लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। खुदकुशी से पहले साधु ने एक वीडियो भी बनाया। इसमें साधु अपनी खुदकुशी के लिए तीन लोगों को जिम्मेदार ठहरा रहा है। वीडियो में साधु नाम लेकर कहता है कि ‘इन्होंने इतना टॉर्चर किया कि अब मैं जान दे रहा हूं।’ घटना सीमावर्ती बाड़मेर जिले के ग्रामीण थाना क्षेत्र के दांता गांव की घटना है। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस पूरे मामले की जांच में जुट गई है। थानाधिकारी परबत सिंह ने बताया कि दांता गांव में पाबूजी राठौड़ नाम की गौशाला है। यहां साधु दयालपुरी (70 वर्ष) पिछले 7-8 साल से इसका संचालन कर रहे हैं। साधु यहीं गौशाला में रहते थे। कुछ स्टाफ भी गौशाला में था। रात में दयालपुरी समेत अन्य स्टाफ सो गया था।

परबत सिंह बताया कि रात में ही दयालपुरी ने गौशाला में टीनशेड पर रस्सी का फंदा लगाकर सुसाइड कर ली। सुबह 5 बजे जब स्टाफ उठा तो दयालपुरी फंदे पर लटक रहे थे। पुलिस मौके पर पहुंची और मृतक के परिजनों को मौके पर बुलाकर शव को नीचे उतरवाया। इसके बाद शव को बाड़मेर जिला अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया है। खुदकुशी करने वाले साधु दयालपुरी ने आत्महत्या से पहले एक वीडियो बनाया। इस वीडियो में साधु कहते हुए दिखाई देते हैं कि ‘मुझे टॉर्चर किया जा रहा है। अब ये सहन नहीं हो रहा है। चेनाराम बेनीवाल और उसकी पत्नी ने मुझे इतना टॉर्चर किया है कि मैं आज आत्महत्या कर रहा हूं। राम गोपाल जोशी गौशाला का अकाउंटेंट है। मैंने उस पर बहुत भरोसा किया, लेकिन वो मेरी गौशाला के सभी डॉक्युमेंट लेकर फरार हो गया। 2 दिन हो गए हैं, वो डॉक्युमेंट लेकर फरार है। चेनाराम और उसकी पत्नी मास्टर माइंड हैं। यह लोग जेल जाने चाहिए।’

साधु दयालपुरी को गायों से इतना प्रेम था कि मरने से पहले अपने गुरु प्रताप पूरी से निवेदन कर गायों को बचाने की अपील की। साथ ही गायों की सेवा में डॉक्टर जसवंत सिंह का भी जिक्र किया है कि वो निस्वार्थ भाव से गायों की सेवा करते हैं। साधु दयालपुरी सरणू गांव के रहने वाले थे। वह ड्राइवर थे। ड्राइविंग छोड़कर तारातरा मठ में संन्यासी बन गए। इसके बाद से बीते 7-8 सालों से पाबूजी राठौड़ गौशाला का संचालन कर रहे थे। लंपी बीमारी में गायों को बचाने का खूब काम किया था। वहीं गायों के चारे के लिए भामाशाहों सहयोग लेते थे। वर्तमान में इस गौशाला में गाय, बछड़े और बीमारी से ग्रसित करीब 1 हजार गौवंश है। बाड़मेर डीएसपी आनंद सिंह राजपुरोहित ने बताया कि घरवालों की रिपोर्ट पर 306 में मामला दर्ज कर लिया है। सुसाइड से पहले एक वीडियो भी आया सामने आया है, जिसमें 3 लोगों पर मरने की वजह बता रहा है।

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