‘पुलिस को नहीं दे सकते सीआरपीसी की धारा 41ए पालन करने का आदेश’ : सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने एफआईआर पर बड़ा फैसला सुनाया है। सर्वोच्च न्यायालय ने हाईकोर्ट को आदेश दिया है कि एफआईआर खारिज करते हुए वो पुलिस को सीआरपीसी की धारा 41ए का पालन करने का आदेश नहीं दे सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना हाईकोर्ट के केस पर सुनवाई के दौरान ये फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट का कहना है, अगर उच्च न्यायालय कोई एफआईआर रद करता है, तो उसे ये अधिकार नहीं है कि वो पुलिस को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 41ए (अब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 35) का पालन करने का आदेश दे।
सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि सीआरपीसी की धारा 41ए के नोटिस के जवाब में अगर कोई आरोपी खुद नियमित रूप से पेश होता है, तो उसे गिरफ्तार करना जरूरी नहीं है। ये एक तरह की अंतरिम राहत है, जो FIR रद करने की स्थिति में मान्य नहीं होगी।
सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस जेबी पारदीवाला औ जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा वाली 2 जजों की बेंच ने इस मामले पर सुनवाई की। उन्होंने कहा, “अगर किसी याचिका में एफआईआर रद करने की मांग की गई हो, तो अदालत को जांच अधिकारियों को सीआरपीसी की धारा 41ए की धारा पालन करने का आदेश पारित नहीं करना चाहिए।”
सीआरपीसी की धारा 41ए (अब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 35) के तहत संज्ञेय अपराधों में पुलिस किसी को गिरफ्तारी किए बिना ही पेश होने का आदेश दे सकती है। इस कानून का उद्देश्य मनमानी गिरफ्तारियों को रोकना है।
दरअसल तेलंगाना हाईकोर्ट ने एक एफआईआर रद करते हुए पुलिस को सीआरपीसी की धारा 41ए का पालन करने का आदेश दिया था। हाईकोर्ट के इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी, जिसपर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सभी उच्च न्यायालयों के लिए ये आदेश जारी किया है।




