यमुना डूबक्षेत्र में रहने वाले पाकिस्तानी हिंदू शरणार्थियों को डीडीए ने जगह खाली करने के जारी किए नोटिस

नई दिल्ली। डीडीए ने मजनू का टीला गुरुद्वारे के पास रह रहे पाकिस्तान के हिंदू रिफ्यूजी को नोटिस जारी किए हैं। यहां पर 7 और 8 मार्च को तोड़फोड़ होनी है। डीडीए से मिली ताजा जानकारी के अनुसार, 7 मार्च की तोड़फोड़ पुलिस बल न मिलने की वजह से टल रही है। 8 मार्च की ड्राइव पर अभी संशय बरकरार है। डीडीए के अनुसार, यमुना के बाढ़ क्षेत्र में रह रहे लोगों को जगह खाली करने के नोटिस दिए गए हैं। डीडीए अधिकारी के अनुसार, यहां पर 7 और 8 मार्च को डिमोलिशन ड्राइव प्रस्तावित है। लेकिन अब पुलिस न मिलने की वजह से यह कुछ समय के लिए टल गई है।
यहां रह रहे पाकिस्तानी हिंदू रिफ्यूजी लोगों के अनुसार, पूरे कैंप को डीडीए की तरफ से 7 और 8 मार्च को तोड़फोड़ के बारे में बताया गया है। हमें जगह खाली करने को कहा गया है। यहां रह रहे लोगों के अनुसार, जुलाई 2023 में यमुना में आई बाढ़ की वजह से यहां रह रहे परिवारों को काफी नुकसान हुआ था। अभी वह उस सदमे से उबर ही पाए हैं कि यह नई आफत आ गई है। लोगों का आरोप है कि डीडीए ने नोटिस जल्दबाजी में लगाए हैं और उन्हें जगह खाली करने के लिए काफी कम समय दिया है। उन्हें कोई वैकल्पिक जगह भी नहीं दी गई है। हालांकि कुछ लोगों को शेल्टर होम में जाने की सलाह डीडीए की तरफ से दी गई है। लोगों के अनुसार, डीडीए को उन्हें समय और जगह दोनों देनी चाहिए। यहां रह रही सोना दास ने बताया कि उनका परिवार 2011 में पाकिस्तान से इस उम्मीद में आया था कि उन्हें यहां कुछ राहत मिलेगी। लेकिन अब यहां भी उसी तरह की दिक्कतें आ रही है।
मिली जानकारी के अनसुार, डीडीए ने सोमवार को पब्लिक नोटिस जारी किया है। जिसमें कहा गया है कि एनजीटी के निर्देश पर यह पूरी कार्रवाई की जा रही है। यमुना का फ्लडप्लेन डीडीए को अतिक्रमण मुक्त करवाना है। इसी क्रम में गुरुद्वारा मजनू का टीला (वेस्टर्न बैंक) में सात और आठ मार्च को तोड़फोड़ की कार्रवाई होनी है। नोटिस में यह भी कहा गया है कि अगस्त 2022 के हाई कोर्ट के नोटिस के अनुसार, प्रभावित परिवार डीयूएसआईबी (दिल्ली अर्बन शेल्टर इंप्रूवमेंड बोर्ड) के नाइट शेल्टरों में रह सकते हैं। यह शेल्टर गीता कॉलोनी, द्वारका सेक्टर-3, फेज-1 और द्वारका सेक्टर-1 में बने हुए हैं। इसलिए लोगों से अपील है कि वह बुधवार तक यह जगह खाली कर दें। अन्यथा वह अपने नुकसान के खुद जिम्मेदार होंगे। यहां रह रहे कई लोगों ने बताया कि उन्हें दो दिन पहले ही इसके बारे में पता चला है। कुछ अधिकारी यहां मंगलवार को पहुंचे और घरों के बाहर नोटिस लगाकर चले गए। इस एरिया के लगभग हर घर को नोटिस दिया गया है। नवंबर 2019 में एनजीटी ने इस मामले की सुनवाई की थी। और इस जगह से अवैध निर्माण हटाने को कहा था। इसी साल 29 जनवरी को हुई सुनवाई में एनजीटी ने डीडीए पर 25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया था और चार हफ्तों में इस अतिक्रमण को हटाने को कहा था।

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