दिल्ली में नकली सिरप बेचने वाली अवैध फैक्ट्री का पर्दाफाश

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने सरगना समेत तीन ड्रग्स तस्करों को किया गिरफ्तार

  • एक करोड़ रुपये मूल्य की दर्द निवारक गोलियां (नशे के लिए इस्तेमाल की जाने वाली) और सिरप जब्त।
  • बवाना सेक्टर दो औद्योगिक क्षेत्र में किराये पर फैक्ट्री लेकर एक साल से बना रहे थे कोडीन सिरप।
  • नकली सिरप बनाकर बेचने वाले नार्को सिंडिकेट के सरगना समेत तीन गिरफ्तार।

राजीव कुमार गौड़/दिल्ली ब्यूरो। क्राइम ब्रांच के एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स ने प्रतिबंधित नशीली दवाओं के एक बड़े नार्को-सिंडिकेट को ध्वस्त कर दिया है। इस ऑपरेशन में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों की पहचान समलुद्दीन उर्फ सादिक, मोहम्मद गुलजार और सलमान के रूप में हुई है। आरोपियों से 1 करोड़ कीमत की 1,80,000 अल्प्राजोलम टैबलेट और 9,000 बोतलें ट्रिप्रोलिडीन हाइड्रोक्लोराइड और कोडीन फॉस्फेट सिरप बरामद किया है। क्राइम ब्रांच का दावा है कि यह रैकेट दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड में फैला हुआ था। आरोपियों ने नकली दवाएं बनाने और सप्लाई करने के लिए एक फैक्ट्री बनाई थी, जिसे पुलिस ने सील कर दिया है।
क्राइम ब्रांच के स्पेशल सीपी देवेश श्रीवास्तव ने बताया 25 दिसंबर को इनपुट के आधार पर एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स की टीम ने 28 वर्षीय समलुद्दीन उर्फ सादिक, गुलजार और सलमान को गिरफ्तार किया था। दरअसल, दिल्ली में ड्रग्स के खिलाफ चल रहे अभियान के तहत टीम ने आगरा के एक तस्कर समलुद्दीन उर्फ सादिक के बारे में खुफिया जानकारी हासिल की, जो प्रतिबंधित अल्प्राजोलम टैबलेट और ट्रिप्रोलिडाइन हाइड्रोक्लोराइड और कोडीन फॉस्फेट सिरप का कारोबार करता है।
इसी कड़ी में कार्रवाई करते हुए तीनों आरोपियों को पकड़ लिया। आरोपियों में समलुद्दीन उर्फ सादिक (किंग पिन) है। यह मूल रूप से आगरा का है। इसके पास प्रताप यूनिवर्सिटी जयपुर से बी-फार्मा की डिग्री है। साथ ही अलग-अलग दवा कंपनियों में काम करने का अनुभव है। पहली बार 2023 में आगरा के थाना शाहगंज पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट के तहत गिरफ्तार किया था। सादिक और गुलजार 2019 में फार्मास्युटिकल की एक ही कंपनी में काम करते थे। सादिक 2020 में सलमान के संपर्क में आया। छह महीने पहले सादिक और सलमान दोनों ने कोडीन आधारित सिरप और अल्प्राजोलम, ट्रामाडोल जैसी प्रतिबंधित दवाओं की मैन्युफैक्चरिंग के लिए एक कारखाना खोलने की प्लानिंग की।
समलुद्दीन उर्फ सादिक के पास संदीप सैनी के नाम से एक फेसबुक आईडी भी है। उस प्रोफाइल डीपी में इसने दवा की तस्वीर लगाई है, ताकि उसकी पहचान भी न हो सके और सोशल मीडिया के जरिए ग्राहकों तक पहुंच बना सके। इसने सलमान और गुलजार की मदद से बवाना में एक किराए की प्रॉपर्टी में फैक्ट्री लगाई थी।
इसी तरह सलमान बागपत का है। 2018 में गोपीचंद कॉलेज ऑफ फार्मेसी बागपत से बी-फार्मा की डिग्री ली। सलमान 2020 में सादिक के संपर्क में आया था। तीसरा आरोपी गुलज़ार 5वीं तक पढ़ा है। इसने ग्राफिक्स डिजाइनिंग का कोर्स किया है। इसने फार्मास्यूटिकल मार्केटिंग कंपनी अबेशिफा नाम से एक फर्म भी रजिस्टर कराई। यह सलमान और सादिक का मुख्य सहयोगी है। इसी ने बरामद दवाओं के लेबल भी डिजाइन किए और सादिक और सलमान को अवैध रूप से लेबल छपवाने में भी मदद की। पुलिस का कहना है पैकेजिंग पर एड्रेस और क्यूआर भी फर्जी थे। आरोपी फेक मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस नंबर, बैच नंबर का यूज कर रहे थे। बरामद सिरप पर एड्रेस और क्यूआर भी नकली था।

 

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