मुंबई से भारत में आतंक फैलाने की साजिश, महाराष्ट्र मॉड्यूल के आईएसआईएस मास्टरमाइंड साकिब नाचन समेत 15 गिरफ्तार

भिवंडी/महाराष्ट्र। नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) ने आतंकवादी संगठन आईएसआईएस के खिलाफ शनिवार को बड़ी कार्रवाई की। एनआईए ने महाराष्ट्र और कर्नाटक के विभिन्न ठिकानों पर छापे मारे और एक मॉड्यूल के 15 सदस्यों को गिरफ्तार किया। एक अधिकारी ने बताया कि एनआईए की कई टीमों ने महाराष्ट्र के बोरीवली-पडघा, ठाणे, मीरा रोड और पुणे में छापेमारी और गिरफ्तारियां कीं। ISIS मॉड्यूल मामले में भिवंडी तालुका के बोरीवली-पडघा गांवों से चार लोगों की गिरफ्तारी के बाद यह क्षेत्र एक बार फिर एनआईए के रडार पर आ गया। साकिब नाचन समेत 15 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, वहीं भिवंडी शहर में तीनबत्ती, निजामपुर, इस्लामपुरा शांतिनगर इलाके में चार लोगों के घरों की तलाशी लेकर पूछताछ के लिए उन्हें नोटिस जारी किया है। साकिब विदेशी आकाओं के इशारे पर आईएसआईएस के हिंसक एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए इम्प्रोवाइज्ड एक्प्लोसिव डिवाइस बनाने सहित आतंकवादी गतिविधियों में शामिल था। एनआईए के सूत्रों के अनुसार छापेमारी के दौरान एनआईए ने बड़ी मात्रा में नकद रुपये, आग्नेयास्त्र, तेज धार वाले हथियार, आपत्तिजनक दस्तावेज, स्मार्टफोन और अन्य डिजिटल उपकरण जब्त किए। एनआईए की जांच में यह भी पता चला है कि मुख्य आरोपी साकिब नाचन और आईएसआईएस महाराष्ट्र मॉड्यूल के सभी सदस्य पडघा-बोरीवली से काम कर रहे थे, जहां उन्होंने पूरे भारत में आतंक फैलाने और हिंसा की घटनाओं को अंजाम देने की साजिश रची थी।
प्रारंभिक जांच से यह भी पता चला है कि गिरफ्तार आरोपियों ने ग्रामीण ठाणे के पडघा गांव को ‘लिवरेटेड जोन’ और ‘अल शाम’ के रूप में खुद घोषित किया था। वह पडघा आधार को मजबूत करने के लिए प्रभावशाली मुस्लिम युवाओं को अपने निवास स्थान से पडघा में स्थानांतरित होने के लिए प्रेरित कर रहे थे। एनआईए ने अरीब मजीद के आवास की भी तलाशी ली, जो इस्लामिक स्टेट समूह में शामिल होने के लिए इराक गया था। वहां वह आईएसआईएस से संबंधित गतिविधियों में शामिल हुआ और बाद में भारत लौट आया। अरीब मजीद नाचन का बहनोई है और उसे 11 दिसंबर को मुंबई में एनआईए मुख्यालय में पेश होने के लिए बुलाया गया है।
साकिब नाचन को हुई थी 10 साल की सजा
साकिब नाचन पूर्व सिमी सदस्य और इंडियन मुजाहिदीन का करीबी सहयोगी रहा है। वहीं, उसका आपराधिक गतिविधियों से जुड़ा इतिहास रहा है। उसे 2002 और 2003 में मुंबई सेंट्रल, विले पार्ले और मुलुंड स्टेशनों पर हुए तीन बम विस्फोटों में शामिल होने के लिए दोषी ठहराया गया था। नाचन को हथियार रखने के लिए आतंकवाद निरोधक अधिनियम (पोटा) के तहत दस साल की कैद की सजा सुनाई गई थी।
रिहा होने के बाद था पडघा में
एक विचाराधीन कैदी के रूप में सलाखों के पीछे समय बिताने के बाद, नाचन को मार्च 2016 में दोषी ठहराया गया था। 2017 में नाचन को जेल से रिहा कर दिया गया और वह अपने रिश्तेदारों के साथ अपने गृहनगर पडघा चला गया। वर्षों से साकिब नाचन पडघा से जुड़ी विभिन्न आतंकवादी गतिविधियों में कथित संलिप्तता के कारण कानून प्रवर्तन एजेंसियों के रडार पर था।
साकिब नाचन को पहली बार 1991 में गुजरात आतंकवादी मामले के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था और शुरू में उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी, जिसे बाद में सुप्रीम कोर्ट ने घटाकर दस साल कर दिया था। 2001 में उन्हें रिहा कर दिया गया लेकिन 2003 विस्फोट मामले में उन्हें फिर से गिरफ्तार कर लिया गया। हालांकि उन पर हत्या के तीन अलग-अलग मामलों में भी मामला दर्ज किया गया था, लेकिन उन मामलों में उन्हें बरी कर दिया गया था। उन्हें 2002 और 2003 के बम विस्फोटों और उसके बाद पोटा मामले में उनकी भूमिका के लिए गिरफ्तार किया गया और सजा सुनाई गई।

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