but it is “difficult” to handle its weight. Make journalism a service
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लेख-विचार

प्रेस कार्ड” जेब में रखना है आसान , मगर उसका भार संभालना “कठिन”, पत्रकारिता को पेशा नहीं, सेवा बनाइए
आज की पत्रकारिता के इसी आचरण और व्यवहार से समाज उसके प्रति वितृष्णा भाव बनाता जा रहा है। पत्रकारिता के…
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