हिमाचल की मुस्लिम महिला आईपीएस के खिलाफ दायर एफआईआर को हाईकोर्ट ने किया रद्द

हाईकोर्ट ने आईपीएस के हक में सुनाया फैसला

शिमला/एजेंसी। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने मुस्लिम महिला आईपीएस अफसर अंजुम आरा को बड़ी राहत दी है। हाईकोर्ट ने अंजुम आर और दो अन्य पुलिस अफसरों खिलाफ दर्ज की गई एफआईआर को रद्द कर दिया है। ये एफआईआर इन अफसरों के खिलाफ एक पूर्व पुलिसकर्मी की पत्नी ने दर्ज करवाई थी। उसने अपनी शिकायत में पति को जबरन सेवानिवृत किए जाने का आरोप लगाया था। यही नहीं, राज्य के पूर्व डीजीपी संजय कुंडू, दो रिटायर्ड पुलिस ऑफिसर्स और तीन एसपी रैंक के अफसरों सहित 10 पुलिस अधिकारियों के खिलाफ भी एफआईआर की गई थी।
बता दें कि धर्मसुख नामक पुलिसकर्मी की पत्नी ने आरोप लगाया था कि उनके पति को जबरन रिटायर कर दिया गया। उसने पूर्व में डीजीपी रहे संजय कुंडू समेत अन्य पुलिस अधिकारियों पर पति के उत्पीड़न का आरोप लगाया था। महिला ने पुलिस अधिकारियों के खिलाफ दाखिल की गई शिकायत में बताया था कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए उसके पति धर्म सुख नेगी को नौकरी से जबरन रिटायर किया। उसने आरोप लगाया था कि पुलिस अधिकारियों ने पहले उसके पति पर झूठे और मनगढ़ंत आरोप लगाए और फिर विभागीय जांच बैठा कर 9 जुलाई 2020 को अपमानित कर जबरन नौकरी से निकाल दिया।
पुलिसकर्मी की पत्नी का आरोप था कि उसके पति की अभी आठ साल की सर्विस बची थी। पुलिसकर्मी की पत्नी के द्वारा लगाए गए आरोप पर आईपीएस अंजुम आरा सहित पुलिस अफसर पंकज शर्मा और बलदेव दत्त नेहाईकोर्ट में याचिका दायर कर प्राथमिकी को रद्द करने की गुहार लगाई थी। अब हाईकोर्ट ने उनके हक में फैसला सुनाते हुए एफआईआर रद्द कर दी है। हाईकोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति वीरेंद्र सिंह ने प्राथमिकी को रद्द करते हुए कहा कि इस मामले में जांच एजेंसी की जांच में शिकायत में लगाए गए आरोपों के अनुसार कुछ भी नहीं पाया गया है। न ही शिकायतकर्ता महिला याचिकाकर्ताओं को कथित अपराध से जोड़ पाई है। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में साफ किया कि अस्पष्ट किस्म के आरोपों के आधार पर यदि कार्यवाही जारी रखने की अनुमति दी जाती है, तो यह कानून की प्रक्रिया के दुरुपयोग के अलावा और कुछ नहीं होगा।

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