युवक आत्मदाह मामले में नयापुरा थाने के 2 एएसआई सस्पेंड, एसएचओ लाइन हाजिर

कोटा,(राजस्थान)। राजस्थान सरकार के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का दावा है कि प्रदेश के पुलिस थानों में अब तुरंत एफआईआर दर्ज होती है। और उस पर कार्रवाई भी शुरू होती है। और इसी वजह से राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की रिपोर्ट में राजस्थान में आपराधिक मामले ज्यादा दिखाए गए हैं। लेकिन गुरुवार की रात को जिस तरह की घटना कोटा शहर के नयापुरा थाने के अंदर हुई। उसने सूबे के मुख्यमंत्री के दावों की पोल खोलकर रख दी है। प्रदेश की सत्तारूढ़ पार्टी का पार्षद एक व्यक्ति की घर जाकर पिटाई करता है। उक्त व्यक्ति पुलिस में शिकायत करता है। लेकिन पार्षद के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती है। और इस बात से गुस्सा होकर वह खुद को आग के हवाले कर देता है। इस घटना के बाद हालांकि पुलिस शुक्रवार को हरकत में दिखी। कोटा शहर जिला पुलिस अधीक्षक केसर सिंह शेखावत ने एक्शन लेते हुए नयापुरा थाने के दो एएसआई सतीश और बच्चन सिंह को सस्पेंड किया। थाना प्रभारी एसएचओ भूपेंद्र सिंह को लाइन हाजिर किया। थाने की जिम्मेदारी अब रामकिशन एसएचओ को सौंपी। गांवड़ी निवासी राधेश्याम मीणा के आत्मदाह के प्रयास की घटना के बाद हुए बवाल को शांत करने को, कोटा शहर जिला पुलिस अब गंभीर नजर आ रही है।

मामले को लेकर किसी तरह की कानून व्यवस्था न बिगड़े। ऐसे में नयापुरा थाने को पुलिस छावनी में पुलिस प्रशासन ने तब्दील कर दिया है। बड़ी संख्या में पुलिस के जवान थाने के बाहर तैनात किए हैं। पुलिस के संसाधन भी थाने के बाहर नजर आ रहे हैं। आज दिन भर नयापुरा थाने पर गहमागहमी बनी रही। पुलिस के आला अधिकारी के थानों के प्रभारी थाने के बाहर तैनात नजर आए। इधर, पुलिस अधीक्षक केसर सिंह शेखावत ने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम की जांच कोटा जिला मुख्यालय के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक को सौंपी है। घटनाक्रम से जुड़े दोनों पक्ष की शिकायत की जांच की जा रही है। इधर, एसपी ने यह भी कहा कि जिस व्यक्ति ने खुद को आग लगाई। अगर वह पुलिस की कार्रवाई से थाने के स्तर पर संतुष्ट नहीं था, तो उसे डिप्टी, एसपी, आईजी तक अपनी शिकायत बतानी चाहिए। इस तरह का कदम उठाना ठीक नहीं है। 

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