उज्जैन में खड़े हनुमानजी की प्रतिमा हटाने में प्रशासन नाकाम, भक्त बोले- यह चमत्कार
उज्जैन स्थित खड़े हनुमान मंदिर की प्रतिमा की शिफ्टिंग अभी नहीं हुई है। प्रशासन की कोशिशें नाकाम रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि हनुमान जी यहां से जाना नहीं चाहते हैं। यही वजह है कि प्रतिमा अभी हिल नहीं पाई है। मंगलवार को यहां भजन-कीर्तन का आयोजन किया गया है।

उज्जैन/मध्य प्रदेश। बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण के लिए खड़े हनुमानजी की प्रतिमा को स्थानांतरित करने की प्रशासन की कोशिश अब तक सफल नहीं हो सकी है। मंदिर को तोड़े जाने के करीब सात दिन बाद भी प्रतिमा अपनी जगह पर ही स्थापित है। विशेषज्ञ प्रतिमा के क्षतिग्रस्त होने की आशंका के चलते उसे हटाने में सावधानी बरत रहे हैं। वहीं, श्रद्धालु इसे हनुमानजी का चमत्कार मानकर उसी स्थान पर मंदिर बनाए रखने की मांग कर रहे हैं।
उज्जैन के कंठाल चौराहा से छत्रीचौक मार्ग के चौड़ीकरण की जद में आ रहे खड़े हनुमान मंदिर की प्रतिमा को स्थानांतरित करने का काम गुरुवार रात करीब 11 बजे शुरू किया गया था। नगर निगम के अमले ने कई प्रयास किए, लेकिन प्रतिमा को अपनी जगह से हटाने में सफलता नहीं मिली। पुरातत्व विभाग की टीम भी मौके पर पहुंचकर प्रतिमा की स्थिति का परीक्षण कर चुकी है, लेकिन अभी तक स्थानांतरण का कोई सुरक्षित तरीका तय नहीं हो पाया है।
प्रतिमा को किसी तरह का नुकसान न पहुंचे, इसके लिए उसे पॉलीथिन से पैक किया गया था। बाद में पैकिंग हटा दी गई। फिलहाल प्रतिमा अपने मूल स्थान पर ही है और उसे अस्थायी रूप से केनोपी के नीचे रखा गया है। हिंदूवादी संगठनों और पंडित की सहमति के बाद मंदिर की दीवार, गुंबद और शिखर को हटा दिया गया है।
मंदिर परिसर के आसपास श्रद्धालुओं की भीड़ लगातार बढ़ रही है। बड़ी संख्या में भक्त प्रतिमा के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। मंदिर के पास भजन-कीर्तन चल रहे हैं और श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखी जा रही हैं। भक्तों का कहना है कि जब तमाम प्रयासों के बावजूद प्रतिमा नहीं हट रही है तो इसे इसी स्थान पर रहने दिया जाना चाहिए।
करीब डेढ़ सौ साल से अधिक पुराने इस खड़े हनुमान मंदिर से शहरवासियों की गहरी आस्था जुड़ी हुई है। बताया जाता है कि सिंधिया रियासत के समय से यहां प्रतिमा स्थापित है। स्वास्थ्य लाभ और बीमारियों से मुक्ति की कामना को लेकर यहां रोज बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं और झाड़ा लगवाते हैं।
मंदिर का गुंबद और दीवारें हटाई जा चुकी हैं तथा आसपास के क्षेत्र को साफ कर दिया गया है। अब प्रतिमा ही अपने मूल स्थान पर खड़ी है। शाम को रोजाना की तरह उसी स्थान पर हनुमानजी का पूजन और आरती की गई। आरती के समय बड़ी संख्या में श्रद्धालु और हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता मौजूद रहे।
क्षेत्रवासियों के अनुसार, लोगों की भावनाओं को देखते हुए महाकाल की सवारी निकलने के बाद ही प्रतिमा को स्थानांतरित करने का निर्णय लिया गया था। महाकाल की सवारी निकल चुकी है और अब एक बार फिर प्रतिमा को सुरक्षित तरीके से हटाने की कवायद शुरू होने की संभावना है।
बताया गया कि जमीन पर खड़ी हनुमानजी की प्रतिमा करीब आठ फीट ऊंची है। प्रतिमा को बिना किसी बाहरी सहारे के खड़ा रखने के लिए उसका एक हिस्सा शिला पर टिका हुआ है। यह शिला करीब चार से पांच फीट तक जमीन के अंदर बताई जा रही है। प्रतिमा को जमीन से सुरक्षित निकालने के लिए आसपास दोबारा खुदाई की जाएगी।
एक श्रद्धालु ने कहा कि प्रशासन की कोशिशें लगातार असफल हो रही हैं। श्रद्धालुओं की इच्छा है कि हनुमानजी का मंदिर इसी स्थान पर रहने दिया जाए। वहीं, प्रयागराज से आए अमृतांश दुबे ने कहा कि वह पिछले पांच-छह वर्षों से यहां आ रहे हैं और उनकी कई मनोकामनाएं पूरी हुई हैं। उन्होंने कहा कि हनुमानजी यहां से हटने को तैयार नहीं हैं और प्रतिमा को स्थानांतरित करने के दौरान उसके खंडित होने की आशंका है। उनका कहना है कि उज्जैन के साथ-साथ दूसरे शहरों से भी बड़ी संख्या में लोग यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं। प्रतिमा के स्थानांतरण को लेकर प्रशासन की तकनीकी कवायद जारी है, जबकि श्रद्धालु आस्था और परंपरा का हवाला देते हुए प्रतिमा को उसी स्थान पर बनाए रखने की मांग कर रहे हैं। अब प्रशासन के सामने प्रतिमा को बिना नुकसान पहुंचाए सुरक्षित तरीके से स्थानांतरित करने की चुनौती है।




