नवगठित बी-पैक्स समितियों का व्यवसाय शुरू कराने की मांग, सचिवों ने सौंपा ज्ञापन

संवाददाता/राजेंद्र प्रसाद मिश्रा
कौशाम्बी/उत्तर प्रदेश। जनपद में हाल ही में गठित की गई बी-पैक्स (साधन सहकारी) समितियों का व्यवसाय अब तक सुचारु रूप से शुरू नहीं होने का मामला सामने आया है। इसे लेकर नवगठित समितियों के सचिवों ने सहकारिता विभाग के अधिकारियों से हस्तक्षेप की मांग की है। कई समितियों के सचिव एकत्र होकर सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारिता, कौशाम्बी से मिले और ज्ञापन सौंपकर जिला एवं प्रदेश शासन से सभी नवगठित समितियों का व्यवसाय तत्काल शुरू कराने की मांग की।
सचिवों का कहना है कि नई समितियों के गठन के बाद किसानों को समितियों से जोड़ने के लिए प्रति किसान 230 रुपये सदस्यता शुल्क लिया गया और उन्हें सदस्य बनाया गया। किसानों को उम्मीद थी कि सहकारी समितियों के माध्यम से खेती के लिए समय से खाद, बीज और अन्य कृषि निवेश उपलब्ध हो सकेंगे। उनका आरोप है कि समितियों का व्यवसाय समय से शुरू नहीं होने और पर्याप्त मात्रा में खाद-बीज उपलब्ध न होने के कारण किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इससे किसानों में आक्रोश भी है।
सचिवों के अनुसार खेती के महत्वपूर्ण समय में किसानों को खाद और बीज की जरूरत पूरी करने के लिए निजी दुकानों का सहारा लेना पड़ रहा है। उनका कहना है कि यदि सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को समय पर कृषि सामग्री उपलब्ध नहीं कराई गई तो उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। साथ ही इससे समितियों के गठन के उद्देश्य पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
नवगठित समितियों के सचिवों ने बताया कि व्यवसाय शुरू नहीं होने के बावजूद समितियों के संचालन से जुड़े कई आवश्यक खर्च लगातार उठाने पड़ रहे हैं। समितियों के गोदाम का किराया, वस्तु एवं सेवा कर तथा अन्य जरूरी खर्चों का भुगतान किया जा रहा है, जबकि समितियों की नियमित आय अभी शुरू नहीं हुई है। इससे सचिवों और समिति पदाधिकारियों पर आर्थिक भार बढ़ रहा है।
ज्ञापन के माध्यम से सचिवों ने मांग की कि जनपद में नवगठित सभी बी-पैक्स समितियों का व्यवसाय तत्काल प्रभाव से शुरू कराया जाए। इसके साथ ही समितियों को नियमानुसार पर्याप्त मात्रा में खाद, बीज एवं अन्य कृषि निवेश उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाए, ताकि किसानों को समय से कृषि सामग्री मिल सके।
सचिवों ने समितियों के गोदाम के किराये, वस्तु एवं सेवा कर और अन्य आवश्यक खर्चों की भी नियमानुसार व्यवस्था कराने की मांग की है। उनका कहना है कि इससे नवगठित समितियों का संचालन बिना आर्थिक बाधा के सुचारु रूप से किया जा सकेगा। सचिवों ने जिला एवं प्रदेश शासन से मामले का शीघ्र संज्ञान लेकर आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है, जिससे बी-पैक्स समितियों के गठन का उद्देश्य पूरा हो और किसानों को समय से खाद, बीज एवं अन्य कृषि सुविधाओं का लाभ मिल सके।





