आरक्षण बढ़ाने की मांग को लेकर पटना में प्रदर्शन, बैरिकेडिंग पर चढ़े प्रदर्शनकारी
पटना में दलित संगठनों ने ‘आरक्षण बढ़ाओ, संविधान बचाओ’ आंदोलन के तहत गांधी मैदान से लोकभवन तक मार्च निकाला। जेपी गोलंबर पर बैरिकेडिंग पार करने और नारेबाजी के दौरान पुलिस से झड़प हुई।

पटना/एजेंसी। बिहार की राजधानी पटना में मंगलवार को दलित संगठनों से जुड़े सैकड़ों लोगों ने विभिन्न मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। ‘आरक्षण बढ़ाओ, संविधान बचाओ’ के नारे लगाते हुए प्रदर्शनकारियों ने गांधी मैदान से लोकभवन की ओर मार्च शुरू किया। पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए जेपी गोलंबर पर बैरिकेडिंग कर प्रदर्शनकारियों को रोक दिया। इससे नाराज कई प्रदर्शनकारी बैरिकेडिंग पर चढ़ गए और जमकर नारेबाजी की। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। समिति के संयोजक अमर आजाद समेत कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया।
जेपी गोलंबर पर रोके जाने के बाद प्रदर्शनकारियों का गुस्सा बढ़ गया। उन्होंने सुरक्षा घेरा तोड़ने का प्रयास किया और बैरिकेडिंग पर चढ़कर नारेबाजी शुरू कर दी। इस दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों ने आक्रामक नारे भी लगाए। पुलिस अधिकारियों के साथ प्रदर्शनकारियों की धक्का-मुक्की की स्थिति बनी, जिसके बाद सुरक्षा बलों ने कई लोगों को हिरासत में लिया।
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में बिहार में दलितों, आदिवासियों और पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण की सीमा बढ़ाकर 65 प्रतिशत करने और इसे संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग शामिल है। इसके अलावा उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय, उच्च न्यायपालिका और निजी क्षेत्र में भी आरक्षण व्यवस्था लागू करने की मांग उठाई। प्रदर्शनकारियों ने दलित समाज के खिलाफ होने वाले अत्याचारों पर रोक लगाने, पीड़ितों को तत्काल न्याय दिलाने और सरकारी ठेकों में 50 प्रतिशत आरक्षण देने की मांग भी रखी।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि देश में अभी भी जातिगत भेदभाव पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। उनका आरोप था कि दलित समाज के लोग आईएएस और आईपीएस जैसे शीर्ष प्रशासनिक पदों तक पहुंचने के बाद भी जाति के नाम पर मानसिक प्रताड़ना का सामना करते हैं। उन्होंने कहा कि जब तक समाज में पूर्ण सामाजिक न्याय सुनिश्चित नहीं होता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
प्रदर्शन को देखते हुए पटना पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे। जेपी गोलंबर से डाकबंगला चौराहे तक मजबूत बैरिकेडिंग की गई थी। सुरक्षा व्यवस्था के लिए 23 थानों के थानाध्यक्षों, नौ अपर पुलिस अधीक्षक और पुलिस उपाधीक्षक स्तर के अधिकारियों के साथ करीब 400 पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी। पुलिसकर्मी प्रदर्शन के दौरान हर गतिविधि पर नजर बनाए हुए थे।
प्रदर्शनकारियों ने आरक्षण के मौजूदा प्रावधानों को लेकर भी सवाल उठाए और कोटे का दायरा बढ़ाने की मांग की। बिहार में हुए इस प्रदर्शन को देश के विभिन्न हिस्सों में दलित संगठनों की ओर से आरक्षण और सामाजिक न्याय से जुड़े मुद्दों को लेकर चल रही सक्रियता की कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।




