राजधानी दिल्ली में बड़े आतंकी हमले की साजिश नाकाम, सात गिरफ्तार; भीड़भाड़ वाले बाजारों की कराई गई थी रेकी

दिल्ली में गिरफ्तार सात आतंकियों से पूछताछ में खुलासा हुआ है कि आईएसआई के इशारे पर भीड़भाड़ वाले बाजारों और सार्वजनिक स्थलों की रेकी की गई थी।

नई दिल्ली/एजेंसी। राजधानी में बड़े आतंकी हमले की साजिश रचने के मामले में गिरफ्तार सात आतंकियों से पूछताछ में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। जांच में सामने आया है कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी के इशारे पर काम कर रहे इस नेटवर्क ने दिल्ली के कई भीड़भाड़ वाले बाजारों और प्रमुख सार्वजनिक स्थलों की रेकी कर तस्वीरें और वीडियो विदेश में बैठे अपने आकाओं तक भेजे थे।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान में बैठे गैंगस्टर से आतंकी बने शहजाद भट्टी और अजमल गुज्जर के निर्देश पर गफ्फार मार्केट, सरोजिनी नगर, कनॉट प्लेस, चावड़ी बाजार और सदर बाजार समेत कई प्रमुख स्थानों को निशाने पर रखते हुए उनकी विस्तृत रेकी कराई गई। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह गतिविधियां संभावित आतंकी हमले की तैयारी का हिस्सा थीं।
अधिकारियों के मुताबिक, जिन स्थानों की रेकी की गई, वे पहले भी आतंकियों के निशाने पर रह चुके हैं। वर्ष 2008 में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों में गफ्फार मार्केट और कनॉट प्लेस जैसे स्थानों को निशाना बनाया गया था। ऐसे में इन स्थानों का दोबारा चयन सुरक्षा एजेंसियों के लिए गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है।
जांच में यह भी सामने आया है कि बीते वर्ष लाल किला हमले के मास्टरमाइंड डॉ. उमर नबी ने भी इन्हीं भीड़भाड़ वाले इलाकों की रेकी कर फोटो और वीडियो अपने विदेशी आकाओं को भेजे थे। एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि मौजूदा मॉड्यूल और पहले के आतंकी नेटवर्क के बीच कोई संबंध है या नहीं।
अधिकारियों के अनुसार, अजमल गुज्जर और शहजाद भट्टी मिलकर भारत में सक्रिय नेटवर्क का संचालन कर रहे थे। जहां भट्टी इंटरनेट मीडिया के जरिए युवाओं को जोड़ने और नेटवर्क विस्तार में जुटा था, वहीं गुज्जर हथियार, गोला-बारूद और नशीले पदार्थों की तस्करी से जुड़े तंत्र को संभाल रहा था। जांच में यह भी सामने आया है कि पंजाब सीमा के रास्ते ड्रोन के माध्यम से हथियार भेजने के कई प्रयास किए गए।
सूत्रों के मुताबिक, यह नेटवर्क देश के विभिन्न हिस्सों में 20 से अधिक मॉड्यूल खड़े करने की योजना पर काम कर रहा था। युवाओं को जोड़ने के लिए उनकी आर्थिक स्थिति का आकलन कर उन्हें धन का लालच दिया जाता था और अवैध गतिविधियों में शामिल करने की कोशिश की जाती थी। फिलहाल स्पेशल सेल और केंद्रीय एजेंसियां मामले की गहन जांच कर रही हैं और नेटवर्क से जुड़े अन्य संदिग्धों की तलाश जारी है।

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