दो हजार साल से बंद रहस्यमयी मकबरा, खजाने और खतरनाक जाल का रहस्य बरकरार

टेराकोटा आर्मी का पता 1974 में चला, जब किसानों को टेराकोटा (पकी हुई मिट्टी) की मूर्ति मिलीं। जल्द ही पुरातत्वविदों ने जमीन के नीचे सेना की एक पूरी टुकड़ी का पता लगाया, जिसे ऐसे सजाया गया था जैसे वे युद्ध के लिए तैयार हों।

बीजिंग/एजेंसी। जमीन के नीचे खजाने से भरे एक विशाल महल और उसकी रक्षा करती पत्थर के योद्धाओं की सेना—यह कोई कहानी नहीं, बल्कि चीन के पहले सम्राट किन शी हुआंग के मकबरे की हकीकत है। यह मकबरा पिछले दो हजार से अधिक वर्षों से बंद है और अब तक इसे खोलने की हिम्मत कोई नहीं जुटा सका है।
इतिहास के अनुसार किन शी हुआंग ने 221 ईसा पूर्व चीन को एकजुट किया था और 210 ईसा पूर्व तक जीवित रहते हुए अमर होने के प्रयास करते रहे। उनके मकबरे को लेकर लंबे समय से रहस्य बना हुआ है।
बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 1974 में जियान के पास कुआं खोद रहे किसानों को इस स्थल का पता चला, जहां प्रसिद्ध ‘टेराकोटा आर्मी’ मिली। इसमें हजारों मिट्टी के सैनिक युद्ध की मुद्रा में खड़े हैं। इस खोज के बाद भी पुरातत्वविद अब तक सम्राट के मुख्य मकबरे में प्रवेश नहीं कर सके हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार मकबरे के भीतर जानलेवा जाल, जहरीले पारे की नदियां और अत्यंत नाजुक कलाकृतियां मौजूद हो सकती हैं। वर्ष 2020 में ‘नेचर’ पत्रिका में प्रकाशित एक अध्ययन में मकबरे के आसपास की मिट्टी में पारे का स्तर असामान्य रूप से अधिक पाया गया, जो इन आशंकाओं को बल देता है।
ग्राउंड-पेनिट्रेटिंग रडार तकनीक से किए गए सर्वे में 76 मीटर ऊंचे पिरामिडनुमा टीले के नीचे विशाल कक्षों और खाली स्थानों का संकेत मिला है, जिससे भूमिगत महल जैसी संरचना होने की संभावना जताई गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मकबरे को बिना पर्याप्त तकनीक के खोला गया तो पारे की गैस तेजी से फैल सकती है, जो मानव जीवन के लिए बेहद खतरनाक होगी। साथ ही, अंदर मौजूद प्राचीन कलाकृतियां भी हवा, नमी और प्रकाश के संपर्क में आते ही नष्ट हो सकती हैं।
टेराकोटा आर्मी इसका उदाहरण है, जिसे 1970 के दशक में बाहर निकालने पर उसके चमकीले रंग कुछ ही मिनटों में फीके पड़ गए थे। चीन के सांस्कृतिक विरासत प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि ये धरोहरें हजारों वर्षों से एक संतुलित वातावरण में सुरक्षित हैं और जरा सी लापरवाही इन्हें अपूरणीय क्षति पहुंचा सकती है।
इसी कारण अब तक मुख्य मकबरे की खुदाई को टाल दिया गया है और वैज्ञानिक अत्याधुनिक तकनीक विकसित होने का इंतजार कर रहे हैं। यह रहस्यमयी मकबरा आज भी दुनिया के लिए एक अनसुलझी पहेली बना हुआ है।

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