28 साल से फरार ‘डॉ. झटका’ गिरफ्तार, पुलिसकर्मी की हत्या समेत कई मामलों में था वांछित
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने हरियाणा के एक पुलिसकर्मी की हत्या के मामले में 28 साल से फरार भगोड़े राजिंदर बैरागी उर्फ डॉ. झटका को मध्य प्रदेश से गिरफ्तार किया है। वह 1999 में पुलिस हिरासत से फरार हो गया था।

नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने हरियाणा के एक पुलिसकर्मी की हत्या के मामले में 28 साल से फरार चल रहे भगोड़ा घोषित अपराधी राजिंदर बैरागी उर्फ ‘डॉ. झटका’ को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी हत्या, हत्या के प्रयास और पुलिस हिरासत से फरार होने समेत कई गंभीर मामलों में वांछित था।
क्राइम ब्रांच के डीसीपी चंदर कुमार सिंह ने बताया कि फरार अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत यह सफलता मिली है। जांच के दौरान जनकपुरी थाने के वर्ष 1997 के दो पुराने मामलों में राजिंदर का नाम सामने आया था। वह लंबे समय से फरार था और वर्ष 2008 में रोहिणी कोर्ट ने उसे भगोड़ा घोषित कर दिया था।
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी ने मध्य प्रदेश में फर्जी दस्तावेजों के जरिए नई पहचान बना ली थी। सब-इंस्पेक्टर नरेंद्र सिंह और हवलदार संजीव कुमार ने तकनीकी और डिजिटल विश्लेषण के आधार पर उसकी लोकेशन और गतिविधियों का पता लगाया। इसके बाद एसीपी सुरेश कुमार और इंस्पेक्टर संजय कौशिक के नेतृत्व में टीम ने 5 अगस्त को मध्य प्रदेश के अशोक नगर से उसे गिरफ्तार कर लिया।
आरोपी को पहले मुंगावली कोर्ट में पेश कर ट्रांजिट रिमांड लिया गया और बाद में द्वारका कोर्ट में पेश कर पूछताछ के लिए रिमांड पर लिया गया है। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह पहले कबड्डी खिलाड़ी था, लेकिन अपराधियों के संपर्क में आने के बाद अपराध की दुनिया में उतर गया।
पुलिस के अनुसार, 10 मई 1998 को हरियाणा के सोनीपत जिले के सैयां खेड़ा गांव में एक शादी समारोह के दौरान विवाद के बाद आरोपी और उसके साथियों ने अंधाधुंध फायरिंग कर दी थी। इस घटना में दुल्हन के चाचा और हरियाणा पुलिस के जवान जय भगवान की मौके पर ही मौत हो गई थी। इस संबंध में गन्नौर थाने में मामला दर्ज किया गया था।
इसके बाद 14 फरवरी 1999 को यूपी पुलिस उसे गाजियाबाद जेल से सोनीपत कोर्ट ले जा रही थी, तभी गन्नौर रेलवे स्टेशन पर वह हथकड़ी समेत पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया। फरारी के बाद वह महाराष्ट्र के कोलाबा पहुंचा, जहां एक वर्ष तक केंद्रीय विद्यालय में शारीरिक शिक्षा शिक्षक के रूप में कार्य किया। बाद में वह मध्य प्रदेश के मुंगावली में बस गया और अपना नाम बदलकर राजिंदर सिंह यादव रख लिया।
वर्ष 2003 में उसने शादी कर ली और वहीं झोलाछाप डॉक्टर के रूप में काम करने लगा, जिससे लोग उसे ‘डॉ. झटका’ के नाम से जानने लगे। इसके अलावा वह प्रॉपर्टी डीलिंग और ठेकेदारी के काम में भी संलिप्त रहा। आरोपी ने फर्जी तरीके से अधिवास प्रमाणपत्र, ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड और वोटर आईडी भी बनवा लिए थे।
पुलिस के मुताबिक, आरोपी के खिलाफ दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में 10 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं। फिलहाल पुलिस उससे गहन पूछताछ कर रही है और उसके नेटवर्क व अन्य मामलों की जांच की जा रही है।




