अमेरिका से तनातनी के बीच ईरान का नया गेमप्लान! पाकिस्तान को किनारे कर पुतिन से कराएगा मध्यस्थता?

इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच तीन वजहों से बातचीत टूट गई थी। सुरक्षा की गारंटी, होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण ईरान का परमाणु कार्यक्रम। ये तीनों ऐसे मुद्दे हैं जिन्हें सुलझाना अत्यंत मुश्किल है। इन मतभेदों को इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के बढ़ते प्रभाव ने और भी बढ़ा दिया है।
तेहरान/एजेंसी। ईरान के विदेश मंत्री सैय्यद अब्बास अराघची ने ओमान और रूस की यात्रा के साथ संकेत दे दिए हैं कि इस्लामाबाद अब एक विश्वसनीय मध्यस्थ नहीं रहा है। हालांकि अब्बास अराघची इस्लामाबाद भी गये थे लेकिन नई रिपोर्ट्स में पता चला है कि ईरान अपनी कूटनीति में रणनीतिक बदलाव कर रहा है। दुनिया के कई और देशों के साथ संपर्क बढ़ाकर ईरान अब सिर्फ पाकिस्तान पर निर्भर नहीं रहना चाहता है। ईरान के कई एक्सपर्ट और सांसदों ने अमेरिका के पक्ष में बातें करने के लिए पाकिस्तान की आलोचना भी की है। सीएनएन न्यूज 18 ने खुफिया सूत्रों के हवाले से बताया है कि ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची का कई देशों से संपर्क साधना, कूटनीतिक माध्यमों में विविधता लाने की एक सोची-समझी कोशिश का हिस्सा है। हालांकि तेहरान ने इस्लामाबाद से बातचीत करके अपनी अहमियत बनाए रखने का संकेत दिया लेकिन इस रिपोर्ट से यह भी पता चलता है कि अमेरिका के साथ अपनी बातचीत में ईरान अब सिर्फ पाकिस्तान पर ही मध्यस्थ के तौर पर निर्भर नहीं रहना चाहता।
इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच तीन वजहों से बातचीत टूट गई थी। सुरक्षा की गारंटी, होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण ईरान का परमाणु कार्यक्रम। ये तीनों ऐसे मुद्दे हैं जिन्हें सुलझाना अत्यंत मुश्किल है। इन मतभेदों को इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के बढ़ते प्रभाव ने और भी बढ़ा दिया है जिसने ज्यादा सख्त रवैया अपना लिया है जिससे तेहरान के लिए कूटनीतिक लचीलेपन की गुंजाइश कम हो गई है। इस आकलन में यह बताया गया है कि तेहरान, दुश्मनी में आए मौजूदा ठहराव को किसी समझौते की दिशा में उठाया गया कदम नहीं, बल्कि एक रणनीतिक वापसी के बजाय एक ‘रणनीतिक विराम’ के तौर पर देख रहा है।
सीएनएन न्यूज 18 की रिपोर्ट में बताया गया है कि खुफिया नोट में पाकिस्तान की भूमिका की खास तौर पर आलोचना की गई है जिसमें यह कहा गया है कि इस्लामाबाद ने अपने प्रभाव को जरूरत से ज्यादा करके आंका। खबरों के मुताबिक पाकिस्तानी नेतृत्व ने यह मान लिया था कि ईरान कमजोर स्थिति से बातचीत कर रहा है। यह दावा भी किया गया है कि पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर ने ईरान की मांगों को अमेरिकी पक्ष तक पूरी तरह से नहीं पहुंचाया। इससे ईरान का विश्वास काफी हद तक टूट गया है। खासकर जब IRGC ईरान के अंदर मजबूत हो रहा है तब पाकिस्तान की विश्वसनीयता काफी कमजोर हो गई है।
सीएनएन न्यूज 18 के मुताबिक पाकिस्तान के साथ बातचीत का रास्ता कमजोर पड़ने के बाद तेहरान अब रूस को एक अहम साझीदार के तौर पर देख रहा है। उम्मीद है कि अराघची, व्लादिमीर पुतिन से मिलकर परमाणु संवर्धन से जुड़ी चिंताओं, यूरेनियम के भंडार के प्रबंधन और व्यापक क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों पर चर्चा करेंगे। यह कदम मॉस्को से तकनीकी और रणनीतिक समर्थन हासिल करने के ईरान के इरादे का संकेत देता है खासकर परमाणु से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर।
इंटेलिजेंस नोट से पता चलता है कि डिप्लोमेसी का अगला फेज शायद मॉस्को में होने वाले डेवलपमेंट और वॉशिंगटन की तरफ से किसी नए सीजफायर की घोषणा पर निर्भर करेगा। कुल मिलाकर देखा जाएगा तो फिलहाल ईरान एक नई तरह का गेम खेलता नजर आ रहा है और सिर्फ पाकिस्तान पर निर्भर रहने के बजाए कई और मध्यस्थों की तलाश कर रहा है।




