एफआईआर की कॉपी पढ़कर ठगों ने फिल्म निर्माता को लगाया चूना, आईएमईआई नंबर बना जाल

मुंबई/एजेंसी। अब अपराधी सिर्फ चोरी ही नहीं कर रहे, बल्कि पुलिस की वेबसाइट पर अपलोड की गई एफआईआर पढ़कर लोगों को साइबर ठगी का शिकार भी बना रहे हैं। ऐसा ही मामला फिल्म लई भारी के एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर आर्यन करिया के साथ हुआ।
ठगों ने महाराष्ट्र पुलिस की वेबसाइट पर अपलोड उनकी एफआईआर से मोबाइल का आईएमईआई नंबर और अन्य जानकारी हासिल की। उसी जानकारी का इस्तेमाल कर उन्हें दोबारा ठग लिया गया। करीया ने इस मामले की शिकायत साइबर पुलिस में दर्ज कराई है और पुलिस से अपील की है कि एफआईआर में संवेदनशील जानकारी सार्वजनिक न की जाए।
आर्यन करिया मुलुंड वेस्ट में अपने परिवार के साथ रहते हैं। 17 दिसंबर 2025 की सुबह उनके घर में चोरी हुई। उन्होंने बताया कि वे सुबह 4:04 बजे अलार्म से जागे और फिर सो गए। जब दोबारा उठे तो उनका महंगा सैमसंग फोल्डेबल फोन, लैपटॉप और 15,000 रुपये नकद गायब थे। घर का दरवाजा खुला मिला। सीसीटीवी फुटेज में सुबह करीब 4:42 बजे एक आरोपी को सोसाइटी में घुसते देखा गया। यह फुटेज उन्होंने मुलुंड पुलिस को सौंप दी और एफआईआर दर्ज कराई।
करीब एक महीने बाद, 19 जनवरी 2026 को उन्हें एक अनजान नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाले ने कहा कि उसे उनका सैमसंग फोल्ड-5 फोन असम में मिला है। ठग ने भरोसा जीतने के लिए सही आईएमईआईनंबर बताया, जो एफआईआर में दर्ज था। उसने मोबाइल कूरियर करने के नाम पर 2,596 रुपये मांगे और एक QR कोड भेजा। करीया ने बताए गए QR कोड पर पैसे भेज दिए, लेकिन बाद में समझ आया कि उनके साथ ठगी हो गई है। कोई पार्सल नहीं आया।
21 जनवरी 2026 को आर्यन करिया ने मुलुंड साइबर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। साथ ही नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCPR) पर भी शिकायत की, जिसे बाद में मुलुंड पुलिस स्टेशन को भेज दिया गया। इसके बाद 4 फरवरी 2026 को वही आरोपी फिर से उनकी सोसाइटी में घुसता हुआ सीसीटीवी में दिखाई दिया। वह पड़ोसी इमारत से अंदर आया और फरार हो गया।
करीया का कहना है कि उनकी एफआईआर की कॉपी में आईएमईआई नंबर, पता और मोबाइल नंबर जैसी जानकारी लिखी गई थी। ठगों ने वही जानकारी पढ़कर उन्हें फोन किया और धोखा दिया। उन्होंने महाराष्ट्र और मुंबई पुलिस से अपील की है कि ऐसी संवेदनशील जानकारी सार्वजनिक न की जाए।

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