दिल्ली के सभी जिलों की डिजिटल कोर्ट दूसरी अदालत में शिफ्ट,अब जज भी हो रहे परेशान

Digital courts of all districts of Delhi shifted to another court, now even judges are getting troubled

नई दिल्ली। सभी जिलों की डिजिटल कोर्ट को सेंट्रल दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में शिफ्ट करने के दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले से न केवल वकील या वादी परेशान हैं, बल्कि न्यायिक अधिकारियों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। तीस हजारी कोर्ट में सामने आया एक हालिया आदेश डिजिटल कोर्ट के जजों की इस परेशानी को बयां कर रहा है।
तीस हजारी की डिजिटल कोर्ट-2 के ज्यूडिशियल मैजिस्ट्रेट, फर्स्ट क्लास मयंक अग्रवाल ने 6 जून को पारित एक आदेश में लिखा है कि मामला शिकायतकर्ता के साक्ष्य दर्ज करने के लिए लगा था। हालांकि, यह अदालत राउज एवेन्यू कोर्ट में शिफ्ट हो गई है। प्रैक्टिस निर्देशों के मुताबिक, साक्ष्य तीस हजारी कोर्ट में दर्ज होने हैं। तीस हजारी कोर्ट में आज तक कोई रूम आवंटित नहीं किया गया है। लिहाजा, इसके लिए मामले को 18 सितंबर तक के लिए स्थगित किया जाता है। यानी तीन महीने बाद। क्या यह वादी या प्रतिवादी के साथ नाइंसाफी नहीं?
पिछले दिनों वकीलों ने हाई कोर्ट के इस फैसले का पुरजोर विरोध किया था। एक दिन की हड़ताल भी की। सभी जिला अदालतों के वकील संगठनों की को-ऑर्डिनेशन कमिटी ने दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस विभू बाखरू से मुलाकात कर वकीलों के आक्रोश की वजहें भी उनके सामने रखीं, जिन्होंने इस फैसले की समीक्षा का आश्वासन दिया है।
डिजिटल कोर्ट के एक जगह पर आने से व्यावहारिक दिक्कतें क्या हैं? इस पर कड़कड़डूमा कोर्ट के वकील पीयूष जैन कहते हैं कि ये कॉन्सेप्ट तो बहुत अच्छा है, पर दिक्कतें प्रशासनिक स्तर पर हैं। आपने राउज एवेन्यू में जजों को छोटे-छोटे चैंबर दे दिए। कई जजों ने अपने स्टेनो को भी बुला लिया। गवाही जो होंगी, वो संबंधित कोर्ट में ही होगी। जब गवाही यहां(कड़कड़डूमा में या संबंधित डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में) होनी है, स्टाफ यहां है, कोर्ट रूम तक यहां मौजूद है तो डिजिटल कोर्ट के जजों को राउज एवेन्यू कोर्ट में बिठाने का कोई सेंस नहीं है। यह मिस्यूज ऑफ स्ट्रक्चर है।
रोहिणी कोर्ट के वकीलों का प्रतिनिधित्व करते हुए रोहिणी कोर्ट बार असोसिएशन के सेक्रेटरी एडवोकेट प्रदीप खत्री कहते हैं कि आपको जजों को इन्फ्रास्ट्रक्चर देना था, आपने उन्हें राउज एवेन्यू में बिठा दिया। मान लीजिए, रोहिणी कोर्ट का मामला है। मुझे एप्लीकेशन देनी है, जिसे सर्टिफाइड कराने के लिए मुझे अब राउज एवेन्यू कोर्ट जाना होगा।
ऐसी तमाम दूसरी प्रक्रियाएं भी जटिल हो गई हैं। दूसरी बात, को-ऑर्डिनेशन कमिटी के साथ मुलाकात में हाई कोर्ट जजों ने कहा कि अभी जैसा है, वैसा चलने दीजिए। जहां तक एविडेंसेस की बात है तो इसके लिए कोई जज आपकों(वकीलों को) राउज एवेन्यू आने के लिए मजबूर नहीं करेगा। आप को बस एक तारीख तय करनी होगी और आप पैरंट कोर्ट से साक्ष्य दर्ज करा पाएंगे।
इस फैसले पर अपनी निराशा व्यक्त करते हुए को-ऑर्डिनेशन कमिटी के प्रवक्ता एडवोकेट नीरज कहते हैं कि कोर्ट को कोर्ट के हिसाब से होना चाहिए। इस तरह से ही कोर्ट शिफ्ट होनी थी तो जजों को वर्क फ्रॉम होम दिया जा सकता था। जजों की एक डिग्निटी होती है, पर यहां उन्हें कॉमन सुविधाओं के बीच लाकर काम करने के लिए छोड़ दिया गया है। उनका आधा स्टाफ यहां है और आधा पैरंट कोर्ट में। दूसरा, फैसला लेते हुए वकीलों और वादियों तक का कोई ख्याल नहीं रखा गया। वकीलों के लिए डिजिटल डिग्निफाइड कियोस्क तो होना चाहिए। वह यहां कैसे अपनी हाजिरी दर्ज कराएगा।

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