गाजियाबाद में सूदखोर के उत्पीड़न से परेशान होकर कारोबारी ने फांसी लगाकर की आत्महत्या

गाजियाबाद। गाजियाबाद में बलराम नगर में सूदखोर के उत्पीड़न से परेशान होकर शहर के प्रमुख मिठाई कारोबारी ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मौके से पुलिस को एक सुसाइड नोट मिला है, जिसमें कहा गया है कि उन्होंने चार वर्ष पहले 40 लाख रुपये ब्याज पर उधार लिए थे। इसके एवज में वह ब्याज समेत करीब दो करोड़ रुपये दे चुके हैं। इसके बाद भी सूदखोर ब्याज समेत एक करोड़ रुपया और मांग रहा है। यहां तक की उसने उनके मकान पर भी कब्जा कर लिया है। कारोबारी ने अपनी मौत के लिए सूदखोर को जिम्मेदार बताते हुए मुख्यमंत्री योगी से कार्रवाई की मांग की है।
बलराम नगर कॉलोनी में चंचल अग्रवाल (53) परिवार के साथ रहते थे। परिवार में पत्नी प्रीति समेत दो बेटे यश अग्रवाल और शुभम हैं। चंचल की गिरी मार्केट कॉलोनी में मिठाई की दुकान है। परिजनों के अनुसार, शुक्रवार सुबह वह काफी देर तक नहीं उठे तो परिवार वाले उन्हें जगाने पहुंचे। अंदर उन्होंने चंचल का शव मकान की बालकनी में छत के कुंडे के फंदे पर लटका देखा। उन्होंने शोर-मचाकर आसपास के लोगों को भी बुला लिया। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को फंदे से उतारकर कब्जे में लिया।
बेटे यश अग्रवाल ने बताया कि उनके पिता ने करीब 4 साल पहले गढ़ी सबलू निवासी में रहने वाले जीते गुर्जर उर्फ जितेंद्र बंसल नाम के एक सूदखोर से करीब 40 लाख रुपये ब्याज पर लिए थे। सूदखोर उन्हें परेशान कर रहे थे। बलराम नगर में साढ़े तीन मंजिला बने मकान को उन्होंने अपने नाम लिखवा लिया है। इससे परेशान होकर ही पिता ने आत्महत्या कर ली। एसीपी विवेक सिंह ने बताया मौके से मिले सुसाइड नोट में ब्याज पर रुपया लेने और सूदखोर के परेशान करने का आरोप लगाया गया है। परिजनों की तरफ से तहरीर के आधार पर रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है और सुसाइड नोट की हेंडराइटिंग की जांच के साथ ही पूरे मामले की जांच की जा रही है।
सूदखोरी के धंधे में दो तरीके से नेटवर्क चलता है, पहले नेटवर्क में धनपति और रसूखदार लोग शामिल होते हैं, जो अपना पैसा 5% प्रतिमाह से लेकर 20 से 30% तक ब्याज पर देते हैं। यह धनपति अपना रुपया दबंग किस्म के लोगों को कम ब्याज पर दे देते हैं। जिससे पैसा ब्याज समेत लौटाने की पूरी जिम्मेदारी इन लोगों की होती है। यह दबंग लोग अधिकांश से उन लोगों को पैसा देते हैं जिनके पास अपनी प्रॉपर्टी मकान, दुकान या प्लॉट होता है। जिससे यदि पैसा वापसी नहीं मिलता है तो उसकी संपत्ति पर कब्ज़ा कर लिया जाए। यहीं नहीं ब्याज पर उधार लेने वालों से एडवांस में चेक भी ले लेते हैं। जिससे यदि उधार लेने वाला ब्याज के पैसे नहीं लौटाता है तो उस चेक को बैंक में जमा कर बाउंस करा देते हैं और फिर 420 का केस थाने में दर्ज करा देते हैं। यही नहीं मूल और ब्याज का रुपया निकलवाने के लिए आपराधिक तत्व के लोगों का भी सहारा लिया जाता है, जो उनके घर और प्रतिष्ठानों में जाकर धमकियां देते हैं।
शिकायत करने से कतराते हैं लोग
बेहद जरूरतमंद व्यक्ति ही सूदखोर से कर्ज लेता है, इसलिए उस पर कर्ज चुकाने का खासा दबाव रहता है। कर्जदार तो पूरी रकम चुकाना चाहता है, मगर ब्याज की रकम ही इतनी ज्यादा होती है कि उसकी कमाई इसे चुकाने में ही चली जाती है। सिर पर कर्ज होने की वजह से वह पुलिस प्रशासन से शिकायत करने का जोखिम उठाने से कतराता है। ऊपर से सूदखारों का रसूख भी उनको ऐसा करने से रोक देता है।

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