श्रद्धा की सच्ची मिसाल: दिहाड़ी के 10,000 जोड़कर लंगर में किए दान, अमरनाथ यात्रा में शिवभक्तों के जूठे बर्तन साफ कर रहे दंपती

मध्य प्रदेश के ग्वालियर से आया यह दंपती श्रीअमरनाथ यात्रा के आधार शिविर मणिगाम में लगे लंगर स्थल पर दो माह तक सेवा देने आए हैं।

मणिगाम। चेहरे पर मुस्कान, मुख पर भोलेनाथ के भजन और सेवा की भावना से ओतप्रोत शामलाल इन दिनों शिवभक्तों की सेवा में पूरी तरह समर्पित हैं। श्रीअमरनाथ यात्रा के आधार शिविर मणिगाम में वह श्रद्धालुओं के जूठे बर्तन साफ करने का कार्य पूरे मनोयोग से कर रहे हैं। इस सेवा कार्य में उनकी पत्नी अनारकली भी उनका बराबर साथ निभा रही हैं।
मध्य प्रदेश के ग्वालियर से आए इस दंपती ने दो माह तक लंगर सेवा देने का संकल्प लिया है। अपने गांव में दिहाड़ी मजदूरी कर जीवन यापन करने वाले शामलाल ने बताया कि उन्होंने पूरे वर्ष मेहनत कर थोड़े-थोड़े पैसे बचाए और लगभग 10 हजार रुपये लंगर सेवा के लिए अर्पित कर दिए। उनका कहना है कि यह सेवा उनके लिए भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने का माध्यम है।
शामलाल और अनारकली जैसे अनेक सेवादार इन दिनों श्रीअमरनाथ यात्रा मार्ग पर लगे लंगरों में निस्वार्थ सेवा देकर श्रद्धा और समर्पण की मिसाल पेश कर रहे हैं। गांदरबल जिले के मणिगाम में स्थित आधार शिविर, जो बालटाल से लगभग 50 किलोमीटर पहले पड़ता है, इन दिनों हजारों श्रद्धालुओं की आवाजाही का केंद्र बना हुआ है। यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में यात्री रुकते हैं और लंगर में भोजन ग्रहण करते हैं।
इसी शिविर में ग्वालियर के एक लंगर संगठन द्वारा लगाए गए पंडाल में शामलाल दिनभर श्रद्धालुओं के जूठे बर्तन एकत्र कर अपनी पत्नी को साफ करने के लिए देते हैं। उनकी यह सेवा न केवल श्रद्धालुओं को सुविधा प्रदान करती है, बल्कि सेवा भाव की एक प्रेरणादायक मिसाल भी प्रस्तुत करती है।
50 वर्षीय शांत स्वभाव के शामलाल ने बताया कि उन्होंने पिछले वर्ष ही यह निश्चय कर लिया था कि वह अमरनाथ यात्रा में आकर सेवा करेंगे। वहीं पवित्र गुफा के समीप एक अन्य लंगर में सेवा दे रहे पवन का मानना है कि भगवान शिव स्वयं किसी श्रद्धालु के रूप में लंगर में प्रसाद ग्रहण करने आते हैं। इसी भावना के साथ वह श्रद्धालुओं को विनम्रता और आदर के साथ भोजन परोसते हैं और आशा करते हैं कि उन्हें एक दिन भगवान शिव के दर्शन अवश्य होंगे।
यात्रा मार्ग के बरारी क्षेत्र में 14,500 फीट की ऊंचाई पर लगे एक लंगर में सेवा दे रहा 17 वर्षीय साहिल भी अपनी लगन से सभी का ध्यान आकर्षित कर रहा है। वह थके हुए श्रद्धालुओं को तुरंत नींबू पानी उपलब्ध कराता है और रात में विश्राम कर रहे यात्रियों के पांव दबाने में भी संकोच नहीं करता। साहिल का कहना है कि वह इस भावना से सेवा करता है कि न जाने कब उसे भगवान शिव के चरण दबाने का अवसर मिल जाए।
श्रीअमरनाथ यात्रा के दौरान इस प्रकार की निस्वार्थ सेवा न केवल आस्था की गहराई को दर्शाती है, बल्कि समाज में मानवता और परोपकार की भावना को भी मजबूत करती है। ऐसे सेवादारों के प्रयास इस पवित्र यात्रा को और भी विशेष और प्रेरणादायक बना रहे हैं।

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