गाजियाबाद में पांच किलो आटा- चावल देकर वृद्ध मां को घर से निकाला

ट्रेनों में भटकते हुए पहुंची गाजियाबाद

गाजियाबाद। हे भगवान… ऐसी औलाद किसी को न दे। इससे तो मैं बेऔलाद ही होती तो अच्छी थी। यह पीड़ा है बेबस मां की, जिनका नाम है मधुप कुंडू। आंखों में आंसू लिए रुंधे गले से बस यही कहे जा रही हैं, औलाद मेरे साथ ऐसा करेगी, यह तो सपने में भी नहीं सोचा था। बेटे और बहू ने उनको तीन किलो आटा, दो किलो चावल और एक फटा सा कंबल देकर घर से निकाल दिया। ट्रेनों में भटकते हुए वह गाजियाबाद पहुंची और भूख से बेहोश हो गईं। उनकी हालत देख पुलिस ने उन्हें नोएडा के वृद्धाश्रम अपना घर में पहुंचा दिया।
कोलकाता के महेशथला की निवासी 65 वर्षीय मधुप कुंडू कहती हैं, बेटे और बहू ने घर से निकालने के लिए छल का सहारा लिया। काफी दिन से कह रहे थे कि उन्हें कहीं छोड़ आएंगे। चार दिन पहले बड़ा बेटा और बहू उन्हें लेकर कोलकाता रेलवे स्टेशन पहुंचे। उन्हें सीट पर बिठाया। बेटे ने कहा, आपको मामा के पास ले जा रहे हैं। ट्रेन चलने से पहले ही बहू और बेटा वहां से चले गए।
उन्होंने बताया कि उनके दो बेटे हैं। छोटा बेटा और बहू कोलकाता में रहते हैं। दोनों निजी कंपनी में नौकरी करते हैं। बड़ा बेटा और बहू कोलकाता के पास ही गांव में रहते हैं। दोनों बेटे उन्हें अपने पास रखने के लिए राजी नहीं है। दोनों एक दूसरे पर इसकी जिम्मेदारी बताते हैं।
मधुप कुंडू ने बताया कि वह ट्रेन से उतरीं तो कोलकाता काफी पीछे छूट चुका था। उन्होंने लोगों से कहा कि वह कोलकाता वापस जाना चाहती हैं। जिसने जो ट्रेन बताई, उसी में सवार हो गईं। इस तरह कोलकाता नहीं, गाजियाबाद पहुंच गईं। पुराने रोडवेज बस स्टैंड पर आकर ओवरब्रिज के नीचे लेट गईं। भूख की वजह से बेहोश हो गईं। ई-रिक्शा चालकों ने उनका हालत देख पुलिस को सूचना दी।
नोएडा के सेक्टर – 64 स्थित अपना घर की टीम में शामिल गायत्री ने बताया कि मधुप कुंडू की काउंसलिंग कराई जाएगी। अगर वह वापस जाना चाहती हैं तो उन्हें पुलिस की मदद से वापस उनके घर पहुंचाया जाएगा। इसमें कोलकाता पुलिस की मदद ली जाएगी। अपना घर आश्रम बेसहारा बुजुर्गों को आश्रय देता है। आश्रम में 300 से ज्यादा बुजुर्ग रह रहे हैं।

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