राजस्थान पुलिस का अजीबोगरीब आदेश, 10 दिन पहले मृत एएसआई का भी कर दिया ट्रांसफर

राजस्थान पुलिस की हालिया तबादला सूची में मृत एएसआई अनोपा राम का नाम शामिल होने से प्रशासनिक हलचल सामने आई है। एएसआई का गत 1 जुलाई को ही निधन हो चुका है और सामाजिक रस्में भी पूरी हो चुकी हैं।

जयपुर/एजेंसी। राजस्थान पुलिस विभाग की ओर से हाल ही में जारी की गई पुलिसकर्मियों की स्थानांतरण सूची में एक तकनीकी और प्रशासनिक विसंगति का मामला सामने आया है। विभाग की ओर से जारी किए गए नवीनतम तबादला आदेशों में एक ऐसे सहायक उप निरीक्षक (एएसआई) का नाम भी शामिल हो गया है, जिनका निधन हो चुका है। इस सूची के सार्वजनिक होने के बाद विभागीय रिकॉर्ड प्रबंधन और प्रशासनिक प्रक्रिया को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, राजस्थान पुलिस मुख्यालय या संबंधित शाखा की ओर से जारी की गई स्थानांतरण सूची में क्रमांक 16 पर सहायक उप निरीक्षक (एएसआई) अनोपा राम का नाम अंकित है। आदेश के तहत उनका स्थानांतरण एक स्थान से दूसरे स्थान पर किया गया है। हालांकि, जमीनी हकीकत यह है कि एएसआई अनोपा राम का गत 1 जुलाई को ही स्वर्गवास हो चुका है। उनके निधन के बाद परिवार की ओर से अंतिम संस्कार और पगड़ी की रस्म जैसी सभी सामाजिक व धार्मिक प्रक्रियाएं भी पूरी की जा चुकी हैं।
दिवंगत पुलिसकर्मी का नाम सक्रिय सेवा सूची और फिर तबादला आदेश में आने के पीछे मुख्य वजह प्रशासनिक स्तर पर रिकॉर्ड का समय पर अपडेट न होना माना जा रहा है। आमतौर पर किसी भी सरकारी विभाग में कार्मिक की वर्तमान स्थिति का विवरण तुरंत सेवा पुस्तिका और ऑनलाइन पोर्टल पर अपडेट किया जाना आवश्यक होता है। इस मामले में प्रतीत होता है कि स्थानांतरण सूची तैयार होने और उसे अंतिम रूप देने के बीच की अवधि में दिवंगत पुलिसकर्मी का डेटाबेस अपडेट नहीं हो सका, जिसके कारण यह लिपिकीय त्रुटि घटित हुई।
इस घटनाक्रम के सामने आने के बाद पुलिस प्रशासनिक हलकों में यह बात उठ रही है कि बड़े स्तर पर स्थानांतरण सूचियां जारी करने से पहले संबंधित कार्मिकों के वर्तमान स्टेटस का पुनः सत्यापन किया जाना चाहिए। यदि सूची को अंतिम रूप देने से ठीक पहले सेवा रिकॉर्ड को री-चेक कर लिया जाता, तो इस तरह की तथ्यात्मक चूक से बचा जा सकता था। फिलहाल, इस अनजाने में हुई त्रुटि की जानकारी उच्च अधिकारियों के संज्ञान में आ चुकी है। माना जा जा रहा है कि विभाग जल्द ही एक संशोधित आदेश या शुद्धिपत्र जारी कर इस विसंगति को दूर कर लेगा।हैं।

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