पाकिस्तान में जजों की शक्तियां कम करने वाला बिल नेशनल असेंबली में पारित,

पाकिस्तान,(एजेंसी)। जिस ज्यूडिशियल रिफॉर्म बिल को लेकर इजरायल में इमरजेंसी जैसे हालात नजर आ रहे हैं उसी जजों की शक्तियां कम करने वाला बिल को पाकिस्तान की नेशनल असेंबली से पारित कर दिया गया है। नेशनल असेंबली ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट (प्रैक्टिस एंड प्रोसीजर), बिल 2023 पारित किया, जिसका उद्देश्य पाकिस्तान के मुख्य न्यायाधीश (सीजेपी) के कार्यालय को एक व्यक्तिगत क्षमता में स्वत: संज्ञान लेने की शक्तियों से वंचित करना है। विधेयक संघीय कानून और न्याय मंत्री आज़म नज़ीर तरार द्वारा प्रस्तुत किया गया था। पीपीपी के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो जरदारी ने संबोधित करते हुए पहल को “बहुत कम और बहुत देर से” करार दिया और कहा कि इसे “न्यायाधीशों के सशक्तिकरण” विधेयक कहा जाना चाहिए।

तरार के बोलने पर उन्होंने कहा कि कहा जा रहा है कि संविधान में संशोधन किया जाना चाहिए। मैं चाहता हूं कि उन्हें पता चले कि संविधान संशोधन की कोई आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में छह बार काउंसिल हैं और उन सभी ने सदन और बिल को पेश करने के लिए कानून को सलाम किया।

बता दें कि इससे पहले पाकिस्तान की संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए शहबाज शरीफ ने सुप्रीम कोर्ट के जज मंसूर अली शाह और न्यायमूर्ति जमाल खान मंडोखेल के असहमतिपूर्ण फैसले के बारे में विस्तार से बात की, जिन्होंने प्रधान न्यायाधीश के किसी भी मुद्दे पर कार्रवाई के लिए स्वत: संज्ञान लेने और विभिन्न मामलों की सुनवाई के लिए पसंद की पीठ का गठन करने के असीमित अधिकार की आलोचना की है।  द एक्सप्रेस ट्रिब्यून अखबार ने बताया कि इस बीच, पाकिस्तान के मंत्रिमंडल ने मंगलवार को एक कानून के मसौदे को मंजूरी दे दी है, जिसमें पाकिस्तान के प्रधान न्यायाधीश की विवेकाधीन शक्तियों को कम करने का प्रावधान है।

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