दिव्यांग उपकरण घोटाला मामले में लुईस खुर्शीद को राहत नहीं, निगरानी याचिका खारिज
लुईस खुर्शीद की दिव्यांग उपकरण वितरण घोटाला मामले में दाखिल निगरानी याचिका खारिज हो गई है। एंटी डकैती न्यायालय के विशेष अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने एमपीएमएलए न्यायालय के पूर्व आदेश को सही मानते हुए यह फैसला सुनाया।

फर्रुखाबाद,उत्तर प्रदेश। दिव्यांग उपकरण वितरण घोटाले के मामले में पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद की पत्नी और पूर्व विधायक लुईस खुर्शीद को अदालत से राहत नहीं मिली। मुकदमे से उन्मोचित किए जाने की मांग संबंधी प्रार्थनापत्र खारिज होने के बाद दाखिल उनकी निगरानी याचिका भी न्यायालय ने निरस्त कर दी। एंटी डकैती न्यायालय के विशेष अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश शैलेंद्र सचान ने सुनवाई के बाद पूर्व में दिए गए आदेश को सही ठहराया।
मामले में आर्थिक अपराध अनुसंधान शाखा, लखनऊ के तत्कालीन निरीक्षक रामशंकर यादव ने 10 जून 2017 को कायमगंज कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप था कि डॉ. जाकिर हुसैन मेमोरियल ट्रस्ट के प्रतिनिधि प्रत्यूश शुक्ला ने दिव्यांग उपकरण वितरण के कई शिविर आयोजित किए जाने का विवरण दिखाकर सरकारी धन का गबन किया। विवेचना के दौरान ट्रस्ट की परियोजना निदेशक लुईस खुर्शीद और अतहर फारुकी के नाम भी सामने आए थे।
आरोपपत्र दाखिल होने के बाद लुईस खुर्शीद ने मुकदमे से उन्मोचित किए जाने की मांग करते हुए न्यायालय में प्रार्थनापत्र दिया था। एमपी-एमएलए न्यायालय ने 17 अप्रैल 2025 को इसे खारिज कर दिया था। इस आदेश को चुनौती देते हुए उन्होंने निगरानी याचिका दाखिल की।
याचिका में दलील दी गई कि प्रथम सूचना रिपोर्ट में उनका और अतहर फारुकी का नाम नहीं था। विवेचक ने जांच के दौरान तत्कालीन विशेष सचिव रामराज सिंह यादव, तहसीलदार मोहन सिंह और मुख्य चिकित्सा अधिकारी पीके पोरवाल से पूछताछ कर दस्तावेज जुटाए, लेकिन उन्हें गवाह नहीं बनाया। याचिका में आरोपपत्र में त्रुटियां होने का दावा करते हुए पूर्व आदेश निरस्त करने की मांग की गई।
सुनवाई के दौरान लुईस खुर्शीद के अधिवक्ता ने न्यायालय के समक्ष पक्ष रखा, लेकिन विशेष अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश शैलेंद्र सचान ने 17 अप्रैल 2025 के आदेश को सही मानते हुए निगरानी याचिका खारिज कर दी। लुईस खुर्शीद के अधिवक्ता शैलेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि इस आदेश के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील दाखिल की जाएगी।




