राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने फहराया सिंहस्थ कुंभ का धार्मिक ध्वज, भारत की प्राचीन विरासत से जुड़ने का दिया संदेश
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शनिवार को नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभ मेले की शुरुआत के अवसर पर रामकुंड में विधिवत पूजा-अर्चना के बाद धार्मिक ध्वज फहराकर 'ध्वजारोहण' समारोह संपन्न किया।

नासिक,महाराष्ट्र। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शनिवार को नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभ मेले के शुभारंभ के अवसर पर आयोजित ध्वजारोहण समारोह में धार्मिक ध्वज फहराया। इससे पहले उन्होंने गोदावरी नदी के तट पर स्थित रामकुंड में विधिवत पूजा-अर्चना की और ध्वज स्तंभ पूजन में भाग लिया। इस अवसर पर महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णुदेव वर्मा, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और सुनेत्र पवार सहित कई वरिष्ठ जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी मौजूद रहे।
समारोह को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि नासिक सिंहस्थ कुंभ मेला भारत की प्राचीन और समृद्ध परंपरा का महत्वपूर्ण प्रतीक है। ऐसे धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों से युवा पीढ़ी को देश की प्राचीन विरासत, आध्यात्मिक चेतना और सदियों पुराने मूल्यों से जुड़ने का अवसर मिलता है। उन्होंने कुंभ मेले की परंपरा को भारतीय संस्कृति की निरंतरता और सामूहिक आस्था का परिचायक बताया।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने त्र्यंबकेश्वर में आयोजित समानांतर कार्यक्रम में दोपहर 12:02 बजे पारंपरिक ध्वज फहराया। इससे पहले शुक्रवार को सिंहस्थ कुंभ मेला महाध्वज ग्राम परिक्रमा निकाली गई। तपोवन मैदान से शुरू हुई यह परिक्रमा संतों-महंतों और हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में रामतीर्थ पंचवटी से होते हुए रामकुंड पहुंचकर संपन्न हुई। इस दौरान श्रद्धालुओं ने धार्मिक उत्साह के साथ आयोजन में भाग लिया।
ध्वज स्तंभ पूजन, ध्वजा पूजन और ध्वजारोहण समारोह को सिंहस्थ महाकुंभ की तैयारियों और धार्मिक आयोजनों की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति मुर्मू के जनसभा को संबोधित करने का भी कार्यक्रम निर्धारित है। उनके दौरे को नासिक और त्र्यंबकेश्वर में होने वाले आगामी धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का दो दिवसीय महाराष्ट्र और हरियाणा दौरा शनिवार से शुरू हुआ है। महाराष्ट्र में सिंहस्थ कुंभ से जुड़े कार्यक्रमों में शामिल होने के बाद वह 1 नवंबर को हरियाणा के कुरुक्षेत्र पहुंचेंगी। वहां राज्य गठन के 60 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित हीरक जयंती समारोह में हिस्सा लेंगी। इसके साथ ही राष्ट्रपति गुरुकुल कुरुक्षेत्र में स्वामी श्रद्धानंद के बलिदान की शताब्दी से जुड़े वार्षिक कार्यक्रम में भी शामिल होंगी। राष्ट्रपति भवन की ओर से शुक्रवार को जारी जानकारी में उनके दौरे का यह कार्यक्रम बताया गया था।




