कंधार बैठक में पाकिस्तान ने तालिबान के सामने रखीं कई शर्तें, भारतीय वाणिज्य दूतावास बंद करने की मांग पर उठे सवाल
पाकिस्तान ने तालिबान के साथ एक बैठक में जलालाबाद में भारतीय वाणिज्य दूतावास को बंद करने की मांग उठाई है। इस पर तालिबान की तरफ से पाकिस्तान को जवाब भी दिया गया है। इसके अलावा पाकिस्तान ने तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान के नेताओं को सौंपने की भी मांग की है, जिस पर तालिबान ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है।

काबुल,एजेंसी। पाकिस्तान और अफगानिस्तान की तालिबान सरकार के बीच कंधार में हुई उच्चस्तरीय बैठक में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। बैठक में पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व वरिष्ठ सैन्य अधिकारी जनरल इनायत हुसैन ने किया, जबकि तालिबान की ओर से कंधार के गवर्नर मुल्ला शिरीन और प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद सहित अन्य अधिकारी शामिल हुए। बैठक में पाकिस्तान ने जलालाबाद स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास बंद करने, तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के नेताओं को सौंपने और अफगानिस्तान में मौजूद तालिबान से जुड़ी संपत्तियों के निपटारे सहित कई मांगें रखीं।
अफगानिस्तान के न्याय मंत्री फजल अहमद मानवी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जानकारी साझा करते हुए दावा किया कि पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल ने जलालाबाद में भारतीय वाणिज्य दूतावास बंद करने का प्रस्ताव रखा। उनके अनुसार, तालिबान पक्ष ने इस मांग पर जवाब दिया कि यदि भारतीय वाणिज्य दूतावास बंद किया जाता है तो उसी शहर में स्थित पाकिस्तानी वाणिज्य दूतावास को भी बंद किया जाना चाहिए। इस कथित प्रस्ताव और जवाब को लेकर क्षेत्रीय कूटनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो सकती है।
बैठक में पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में मौजूद टीटीपी नेताओं और लड़ाकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी उठाई। पाकिस्तानी अधिकारियों ने कथित तौर पर तालिबान प्रतिनिधियों को टीटीपी से जुड़े लोगों के ठिकानों की जानकारी और भौगोलिक निर्देशांक सौंपे। बताया गया है कि तालिबान ने इस मामले में सकारात्मक रुख दिखाया, लेकिन इसके बदले पाकिस्तान में मौजूद इस्लामिक स्टेट से जुड़े प्रशिक्षण शिविरों और ठिकानों को बंद करने की मांग रखी। तालिबान की ओर से कथित तौर पर अपने विरोधियों के सैन्य शिविरों, प्रशिक्षण स्थलों और कार्यालयों से संबंधित दस्तावेज भी सौंपे गए।
अफगानिस्तान में तालिबान से जुड़े नेताओं की पाकिस्तान में मौजूद संपत्तियों का मुद्दा भी बैठक में उठा। पाकिस्तान ने इन संपत्तियों की बिक्री की मांग की, जिस पर तालिबान ने कथित तौर पर सहमति जताई, लेकिन शर्त रखी कि संपत्तियों का मूल्य मौजूदा बाजार दर के अनुसार तय किया जाए। बताया जाता है कि पाकिस्तान में तालिबान से जुड़े लोगों के मकान, कृषि भूमि और अन्य अचल संपत्तियां मौजूद हैं। हालांकि, इन संपत्तियों के स्वामित्व और प्रस्तावित सौदे की शर्तों को लेकर अभी स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।
बैठक में रूस से ईरान भेजी जाने वाली रसद सहायता का मुद्दा भी उठा। पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के रास्ते इस तरह की आपूर्ति रोकने की मांग की, लेकिन तालिबान ने कथित तौर पर इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया। तालिबान पक्ष का रुख बताया गया कि वह अमेरिका और अरब देशों के साथ ईरान के तनाव के मामले में किसी पक्ष का समर्थन नहीं करना चाहता।
दोनों पक्षों ने बैठक में उठाए गए मुद्दों पर अपने-अपने वादों को पूरा करने के लिए एक महीने की समय-सीमा तय की है। हालांकि, पाकिस्तान और तालिबान सरकार के बीच लंबे समय से चले आ रहे अविश्वास, सीमा विवाद और सुरक्षा संबंधी मतभेदों को देखते हुए इन प्रस्तावों को जमीन पर उतारना आसान नहीं माना जा रहा है। बैठक के नतीजे आने वाले समय में पाकिस्तान-अफगानिस्तान संबंधों और क्षेत्रीय कूटनीति की दिशा को प्रभावित कर सकते हैं।




