सीजेपी के प्रदर्शन में शामिल छात्र को नोटिस देने एवं सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना मामले में एसीपी डॉ रवि शंकर मिश्रा निलंबित

डीजीपी राजीव कृष्ण ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना कर छात्र को नोटिस जारी करने के मामले की जांच का निर्देश दिया है।

नेशनल डेस्क। दिल्ली के जंतर-मंतर पर काकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन में शामिल छात्र अक्षत त्रिपाठी को सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बावजूद नोटिस जारी किए जाने के मामले में उत्तर प्रदेश सरकार ने बड़ी कार्रवाई की है। सरकार ने गौतमबुद्धनगर पुलिस कमिश्नरेट में तैनात एसीपी एवं कार्यपालक मजिस्ट्रेट तृतीय डॉ. रवि शंकर मिश्रा को निलंबित कर दिया है। इस कार्रवाई की जानकारी राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को भी दी है।
पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण ने मामले की जांच के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया था कि 20 से 25 जुलाई के बीच जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन में शामिल किसी भी युवा के खिलाफ कार्रवाई न की जाए। इसके बावजूद छात्र को किस आधार पर नोटिस जारी किया गया, इसकी जांच कराई जा रही है। जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
काकरोच जनता पार्टी ने पेपर लीक के मुद्दे को लेकर 20 से 25 जुलाई के बीच जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया था। प्रदर्शन में देशभर से बड़ी संख्या में युवाओं ने भाग लिया था। सरकार के साथ बातचीत के बाद प्रदर्शन समाप्त कर दिया गया था। इसके बाद प्रदर्शन में शामिल युवाओं के खिलाफ विभिन्न मामलों में पुलिस कार्रवाई की बात सामने आई थी।
इसी क्रम में चार सितंबर को एसीपी एवं कार्यपालक मजिस्ट्रेट तृतीय गौतमबुद्धनगर डॉ. रवि शंकर मिश्रा ने गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय के छात्र और झांसी निवासी अक्षत त्रिपाठी को शांति भंग सहित विभिन्न मामलों का हवाला देते हुए पांच लाख रुपये के मुचलके का नोटिस जारी किया था। नोटिस जारी होने के बाद काकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता सौरभ दास ने जिला प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाए थे। बाद में सुप्रीम कोर्ट के रुख को देखते हुए पुलिस ने पांच सितंबर को यह नोटिस वापस ले लिया था।
बताया गया कि नोटिस थाना इकोटेक प्रथम के उप निरीक्षक शिवा पांडेय की रिपोर्ट के आधार पर जारी किया गया था। थाना प्रभारी को भेजी गई रिपोर्ट में आरोप लगाया गया था कि संबंधित छात्र विश्वविद्यालय के अन्य छात्रों को साथ लेकर धरने में पहुंचा था और सरकार के विरोध में कथित रूप से भ्रामक बातें फैलाकर अन्य छात्रों को उकसा रहा था। रिपोर्ट में इससे अशांति की आशंका जताई गई थी। इसी रिपोर्ट के आधार पर कार्यपालक मजिस्ट्रेट को कार्रवाई के लिए रिपोर्ट भेजी गई थी।
गौतमबुद्धनगर में पुलिस कमिश्नरेट व्यवस्था लागू होने के कारण शांति भंग, उपद्रव की आशंका और अन्य निरोधात्मक मामलों में कार्रवाई के अधिकार पुलिस कमिश्नरेट के अधिकारियों को प्राप्त हैं। इन्हीं अधिकारों के तहत छात्र को पांच लाख रुपये के मुचलके का नोटिस जारी किया गया था। हालांकि, मामले में मुख्य आपत्ति यह सामने आई कि सुप्रीम कोर्ट ने एक सितंबर को जंतर-मंतर के प्रदर्शन में शामिल युवाओं के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया था, जबकि छात्र को नोटिस चार सितंबर को जारी किया गया।
पुलिस कमिश्नरेट व्यवस्था वाले शहरों में गैंगस्टर अधिनियम और गुंडा अधिनियम के तहत कार्रवाई, शांति भंग की आशंका में पाबंद करने, उपद्रव की आशंका में निरोधात्मक कार्रवाई तथा अवैध रूप से अर्जित संपत्ति के संबंध में कार्रवाई जैसे अधिकार पुलिस कमिश्नरेट के पास होते हैं। वहीं, जिन शहरों में पुलिस कमिश्नरेट व्यवस्था लागू नहीं है, वहां इस तरह की निरोधात्मक कार्रवाई और अन्य संबंधित अधिकार जिलाधिकारी के पास होते हैं। इन अधिकारों का प्रयोग अपर जिलाधिकारी और उप जिलाधिकारी को भी सौंपा जा सकता है।
डॉ. रवि शंकर मिश्रा वर्ष 2018 बैच के प्रांतीय पुलिस सेवा अधिकारी हैं। उनकी नियुक्ति 31 मई 2021 को हुई थी और वह मूल रूप से प्रतापगढ़ के रहने वाले हैं। उन्होंने पीएचडी की शैक्षणिक योग्यता हासिल की है। कार्रवाई से पहले वह गौतमबुद्धनगर पुलिस कमिश्नरेट में एसीपी एवं कार्यपालक मजिस्ट्रेट तृतीय के पद पर तैनात थे।

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