मुंबई की मेयर रितू तावड़े ने खत्म की विशाखा राउत की पार्षदी,छह साल चुनाव लड़ने पर रोक
मुंबई की पूर्व मेयर विशाखा राउत को बड़ा झटका लगा है। बीएमसी ने जनवरी 2026 में चुनाव जीतीं राउत की सदस्यता को खत्म कर दिया है। मुंबई की मेयर रितू तावड़े ने इस फैसले का ऐलान सदन में किया।

मुंबई/ब्यूरो। बृहन्मुंबई महानगरपालिका के चुनाव को अभी एक साल भी पूरा नहीं हुआ है कि शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) को बड़ा झटका लगा है। मुंबई की पूर्व महापौर और दादर के वार्ड नंबर 191 से निर्वाचित पार्षद विशाखा राउत की सदस्यता रद्द कर दी गई है। उनका यह वार्ड अन्य पिछड़ा वर्ग की महिलाओं के लिए आरक्षित था। उनके द्वारा प्रस्तुत जाति प्रमाण पत्र को अमान्य घोषित किए जाने के बाद यह कार्रवाई की गई है। इसके साथ ही विशाखा राउत के छह साल तक चुनाव लड़ने पर भी रोक लगा दी गई है।
विशाखा राउत ने 2026 के बीएमसी चुनाव में वार्ड नंबर 191 से शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के टिकट पर चुनाव लड़ा था और 167 मतों से जीत हासिल की थी। चुनाव के बाद उनके प्रतिद्वंद्वी और शिवसेना के शिंदे गुट के नेता सदा सरवणकर की बेटी प्रिया सरवणकर ने उनके जाति प्रमाण पत्र की वैधता को चुनौती देते हुए शिकायत दर्ज कराई थी।
मामला पालघर जिला जाति प्रमाण पत्र जांच समिति के पास पहुंचा। समिति की जांच में पाया गया कि विशाखा राउत का कुनबी यानी अन्य पिछड़ा वर्ग का प्रमाण पत्र गलत क्षेत्राधिकार से जारी किया गया था। इसके आधार पर समिति ने प्रमाण पत्र को अमान्य घोषित कर दिया। प्रमाण पत्र अमान्य होने के बाद नगर निकाय कानूनों के तहत निर्वाचित पार्षद के पद पर बने रहने की पात्रता भी समाप्त हो गई।
महाराष्ट्र के नगर विकास विभाग ने इसी आधार पर अधिसूचना जारी कर विशाखा राउत को 20 अगस्त 2026 से पार्षद पद के लिए अयोग्य घोषित कर दिया और छह साल तक चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी। सात सितंबर 2026 को बीएमसी सदन की बैठक में मुंबई की महापौर रितू तावड़े ने इसकी आधिकारिक घोषणा की।
विशाखा राउत ने बीएमसी और जाति प्रमाण पत्र जांच समिति की कार्रवाई के खिलाफ बंबई उच्च न्यायालय का रुख किया था। हालांकि, अदालत ने उनकी याचिका खारिज कर दी और उन्हें राहत नहीं मिली। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नेताओं और विशाखा राउत की ओर से इस कार्रवाई को राजनीतिक प्रतिशोध बताया गया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता संजय राउत समेत अन्य नेताओं ने भी इस मामले में सत्तारूढ़ पक्ष पर राजनीतिक बदले की कार्रवाई करने का आरोप लगाया है।
विशाखा राउत का मुंबई की राजनीति में लंबा राजनीतिक सफर रहा है। वह 1990 के दशक में बीएमसी की राजनीति में सक्रिय हुईं और 1997 में मुंबई की महापौर बनीं। इसके बाद 1999 में उन्होंने दादर विधानसभा सीट से चुनाव जीता और 2004 तक महाराष्ट्र विधानसभा की सदस्य रहीं। बीएमसी से विधानसभा तक और बाद में दोबारा मुंबई की स्थानीय राजनीति में उनकी सक्रियता बनी रही। उन्हें शिवसेना के पुराने संगठन और दादर-शिवाजी पार्क क्षेत्र की राजनीति की गहरी समझ रखने वाले नेताओं में माना जाता रहा है। 2026 के बीएमसी चुनाव में उन्होंने वार्ड नंबर 191 से जीत दर्ज की थी, लेकिन जाति प्रमाण पत्र विवाद के चलते अब उनकी पार्षद सदस्यता समाप्त हो गई है।




