45 किलो के सवा 2 लाख रुद्राक्ष, 12 साल की कठिन साधना का प्रण लेने वाले हठयोगी रुद्राक्ष वाले बाबा
2,25 lakh Rudraksha de 45 kg, Hathayogi Rudraksha Baba que hizo el voto de 12 años de dura sadhana

प्रयागराज/उत्तर प्रदेश। देश के कोने कोने यहां तक की विदेशों से भी साधु संत हठयोगी आध्यात्मिक और धार्मिक गुरु उनके अनुयायी इस बार महाकुंभ 2025 में पूरे लव लश्कर के साथ शामिल हो रहे हैं। महाकुंभ 2025 में पधारे साधु संत श्रीमहंत संगम की रेती पर धर्म अध्यात्म और सनातन संस्कृति के प्रचार प्रसार और रक्षार्थ जप-तप-अनुष्ठान कथा प्रवचन में स्वयं को समर्पित करते हैं। वहीं विभिन्न अखाड़ों से जुड़े कुछ हठयोगियों की साधना क्रिया, हठयोग ,अजब गजब भेषभूषा उनकी प्रसिद्धि का कारण बन जाता है। भक्तजन उन्हें उसी नाम से जानने लगते हैं।कुछ इसी तरह का नाम रुद्राक्ष वाले बाबा यानि गीता नन्द महाराज का भी है। आवाहन अखाड़ा हरियाणा शाखा के सचिव गीतानंद गिरि महाराज सिर पर सवा दो लाख रुद्राक्ष धारण करते हैं। जिसका वजन लगभग 45 किलो है। इतना ही नहीं उनके पूरे शरीर पर रुद्राक्ष ही रुद्राक्ष दिखता है क्योंकि उनके वस्त्र भी रुद्राक्ष से ही बने होते हैं । हाथों में भी रुद्राक्ष लपेटे रहते हैं। जिसके दर्शन और आशीर्वाद के लिए लाखों लाख भक्त रोज आते हैं।
रुद्राक्ष वाले बाबा के नाम से प्रसिद्ध गीतानंद जी महाराज बताते हैं कि यह संकल्प उन्होंने पिछले अर्धकुंभ 2019 में लिया था। पहले उन्होंने सवा लाख रुद्राक्ष धारण करने का संकल्प लिया था, लेकिन महाकुंभ 2025 के आते-आते इनकी संख्या सवा दो लाख पहुंच चुकी है। अब उनके सर पर ढाई हजार से ज्यादा मालाएं सुशोभित हो रही हैं। गीता नंद महाराज का हठयोग 12 साल का है अभी 6 साल ही बीते हैं अभी 6 साल यानि अगले अर्धकुंभ तक यह संकल्प पूरा होगा। इस दरमियान रुद्राक्ष की संख्या बढ़ती ही जाएगी। उन्होंने बताया कि कुल 925 मालाओं में सवा लाख रुद्राक्ष की मालाएं बनती है। भगवान शिव को समर्पित यह संकल्प हठयोग विश्व कल्याण शांति सनातन संस्कृति के प्रचार प्रसार और रक्षा के लिए है। वैसे भी हर रुद्राक्ष का एक विशिष्ट महत्व है, यह रुद्राक्ष न केवल साधक के लिए आध्यात्मिक शक्ति का प्रतीक है बल्कि रुद्राक्ष धारण करने से मानसिक शांति स्वास्थ्य में सुधार और सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है।
महाकुंभ 2025 की भव्यता दिव्यता
गंगा यमुना और अदृश्य सरस्वती के त्रिवेणी- पावन संगम स्थल पर आयोजित हो रहा महाकुम्भ 2025 दुनिया के सबसे विशालतम धार्मिक ,आध्यात्मिक और सनातन संस्कृति त्रिवेणी के रूप में स्थापित होने की ओर अग्रसर है। वहीं महाकुंभ 2025 को साधु- संतों के सबसे बड़े संत समागम के रूप में जाना जायेगा। महाकुंभ 2025 की भव्यता दिव्यता और नव्यता पूरे विश्व में एक मिशाल कायम करेगी।



