खाकी का मानवीय चेहरा: दुख की घड़ी में शोकाकुल परिवार का सहारा बनी गाजियाबाद पुलिस
रक्षाबंधन के अवसर पर लोनी के नौरसपुर गांव में गाजियाबाद पुलिस ने मानवीय संवेदनशीलता की मिसाल पेश की। सड़क हादसे में बच्चे को खो चुके शोकाकुल परिवार से एसीपी लोनी ने मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया। उन्होंने परिवार के दूसरे बच्चे को मिठाई खिलाकर स्नेह और आशीर्वाद दिया। समाजसेवी सतीश उपाध्याय ने भी परिवार से मिलकर आर्थिक सहायता दी। इस पहल ने पुलिस के सुरक्षा के साथ-साथ संकट की घड़ी में जनता के साथ खड़े रहने वाले मानवीय रूप को सामने रखा।

संवाददाता/राजीव अवस्थी
गाजियाबाद। रक्षाबंधन के पावन पर्व पर गाजियाबाद पुलिस ने संवेदनशीलता और मानवीयता की मिसाल पेश की। पुलिस आयुक्तालय गाजियाबाद के लोनी क्षेत्र के सहायक पुलिस आयुक्त ने ट्रॉनिका सिटी क्षेत्र के ग्राम नौरसपुर पहुंचकर उस परिवार से मुलाकात की, जिसने हाल ही में सड़क दुर्घटना में अपने एक बच्चे को खो दिया था। हादसे के बाद परिवार गहरे सदमे में था।
परिवार की पीड़ा को देखते हुए सहायक पुलिस आयुक्त ने उनके घर पहुंचकर परिजनों से मुलाकात की और उन्हें ढांढस बंधाया। इस दौरान उन्होंने परिवार के दूसरे बच्चे से आत्मीयता के साथ बातचीत की, उसे अपने हाथों से मिठाई खिलाई और स्नेहपूर्वक आशीर्वाद दिया। पुलिस अधिकारी के इस आत्मीय व्यवहार से दुख की घड़ी में परिवार को भावनात्मक संबल मिला।
इस अवसर पर समाजसेवी एवं उद्योग मंडल अध्यक्ष सतीश उपाध्याय भी मौजूद रहे। उन्होंने भी शोकाकुल परिवार से मुलाकात कर उन्हें सांत्वना दी तथा आर्थिक सहायता प्रदान करते हुए हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया।
रक्षाबंधन जैसे पारिवारिक और भावनात्मक पर्व के बीच पुलिस अधिकारियों द्वारा पीड़ित परिवार के घर पहुंचकर संवेदना व्यक्त करने के इस प्रयास की स्थानीय स्तर पर सराहना की गई। परिवार के लिए यह मुलाकात केवल औपचारिकता नहीं रही, बल्कि मुश्किल समय में समाज और प्रशासन के साथ खड़े होने का भरोसा देने वाली पहल बनी।
गाजियाबाद पुलिस की इस पहल ने यह संदेश दिया कि पुलिस की भूमिका केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने और अपराध पर नियंत्रण तक सीमित नहीं है। संकट की घड़ी में पीड़ित परिवारों के साथ खड़ा होना, उनकी भावनाओं को समझना और जरूरत के समय उन्हें सहयोग देना भी पुलिस की सामाजिक जिम्मेदारी का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
रक्षाबंधन के अवसर पर सामने आए इस मानवीय पहलू ने खाकी की संवेदनशील छवि को सामने रखा। हादसे में बच्चे को खोने वाले परिवार के दुख को बांटने और उसे भावनात्मक तथा आर्थिक संबल देने के प्रयास ने पुलिस और आमजन के बीच भरोसे के रिश्ते को भी मजबूती देने का काम किया।



