रायपुर कलेक्ट्रेट के ऑक्सीजोन में आम का पेड़ रातोंरात काटा गया, ममेयर और कमिश्नर भी अनजान

रायपुर कलेक्टोरेट परिसर स्थित ऑक्सीजोन में सिस्टम की लापरवाही के चलते एक हरा-भरा आम का पेड़ काट दिया गया है। कुछ दिन पहले ही यह पेड़ स्वतंत्रता दिवस पर तिरंगे के रंगों से सजा हुआ था। खास बात यह है कि इस पेड़ को किसने और किसकी अनुमति से काटा, इसकी जानकारी न तो महापौर मीनल चौबे को है और न ही जोन कमिश्नर को।

रायपुर/एजेंसी। कलेक्ट्रेट परिसर स्थित ऑक्सीजोन में हरे-भरे आम के पेड़ की रहस्यमय तरीके से कटाई का मामला सामने आया है। करीब कुछ दिन पहले तक जो पेड़ 15 अगस्त के अवसर पर तिरंगे के रंगों से रोशन होकर परिसर की खूबसूरती बढ़ा रहा था, अब वहां उसका नामोनिशान तक नहीं है। पेड़ किसने और किसके आदेश पर काटा, इसे लेकर जिम्मेदार अधिकारियों के पास भी स्पष्ट जानकारी नहीं है।
मामले के सामने आने के बाद कलेक्ट्रेट परिसर में पेड़ की कटाई को लेकर सवाल उठने लगे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि संवेदनशील और सुरक्षित माने जाने वाले कलेक्ट्रेट परिसर के भीतर बिना अनुमति पेड़ काटने की कार्रवाई आखिर किसके निर्देश पर की गई।
बताया जा रहा है कि करीब 19 एकड़ क्षेत्र में फैले ऑक्सीजोन में हजारों पेड़-पौधे मौजूद हैं। ऐसे स्थान पर एक हरे-भरे आम के पेड़ को काटे जाने से पर्यावरण संरक्षण और प्रशासनिक निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।
पेड़ काटे जाने की जानकारी सामने आने के बाद जब नगर निगम के जोन चार की आयुक्त दिव्या चंद्रवंशी से इस संबंध में जानकारी ली गई तो उन्होंने बताया कि पेड़ काटने के लिए उनसे किसी प्रकार की अनुमति नहीं ली गई थी। उन्होंने स्वयं भी पेड़ काटे जाने की जानकारी होने से अनभिज्ञता जताई।
इस मामले में महापौर और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों के भी अनजान होने की बात सामने आई है। इससे यह सवाल और गंभीर हो गया है कि आखिर पेड़ काटने की अनुमति किसने दी और किसके निर्देश पर यह कार्रवाई की गई।
बताया गया कि स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर 15 अगस्त को यही आम का पेड़ तिरंगे के केसरिया, सफेद और हरे रंग की रोशनी से जगमगा रहा था। उस समय पेड़ पूरी तरह हरा-भरा और जीवंत नजर आ रहा था। कुछ ही दिनों बाद पेड़ को काट दिए जाने से उसी स्थान पर अब खालीपन दिखाई दे रहा है।
पेड़ की कटाई से जुड़ी तस्वीरें सामने आने के बाद मामले को लेकर लोगों में भी नाराजगी और सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि एक पेड़ को बड़ा होने में वर्षों लग जाते हैं, ऐसे में बिना स्पष्ट कारण और अनुमति के हरे पेड़ की कटाई गंभीर विषय है।
मामला सामने आने के बाद नगर निगम प्रशासन ने पूरे प्रकरण की तथ्यात्मक जांच के आदेश दिए हैं। जांच के दौरान यह पता लगाने का प्रयास किया जाएगा कि पेड़ किसने कटवाया, कटाई के लिए किसी स्तर पर अनुमति ली गई थी या नहीं और यदि अनुमति नहीं थी तो जिम्मेदार कौन है।
अब जांच रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि ऑक्सीजोन में आम के पेड़ की कटाई किन परिस्थितियों में हुई। साथ ही यह भी सामने आएगा कि नियमों का उल्लंघन हुआ है या नहीं। लोगों की नजर अब जांच के परिणाम और जिम्मेदारों के खिलाफ संभावित कार्रवाई पर टिकी है।
कलेक्ट्रेट जैसे महत्वपूर्ण परिसर में पेड़ कटने की घटना ने प्रशासनिक निगरानी और पर्यावरण संरक्षण व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर शहर में हरियाली बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण की बात की जाती है, वहीं दूसरी ओर संरक्षित परिसर में हरे पेड़ की कटाई की जानकारी जिम्मेदार अधिकारियों तक नहीं पहुंचना व्यवस्था की गंभीर चूक मानी जा रही है।

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