सोशल मीडिया ट्रोलिंग से आहत अलीगढ़ एसएसपी नीरज जादौन ने जताई पीड़ा, बोले- मैं भी एक इंसान हूं
एसएसपी नीरज जादौन ने सोशल मीडिया पर अभद्र टोलिंग पर दुख जताया है। भावुक पोस्ट में उन्होंने पूरे जुनून और ईमानदारी के साथ काम करने की बात कही है।

अलीगढ़/उत्तर प्रदेश। सोशल मीडिया पर लगातार हो रही ट्रोलिंग और अभद्र टिप्पणियों से आहत अलीगढ़ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नीरज जादौन ने भावुक पोस्ट के जरिए अपनी पीड़ा जाहिर की है। शुक्रवार की परेड के बाद आयोजित होने वाले ऑर्डर्ली रूम को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं के बीच एसएसपी ने नियमों और अपनी जिम्मेदारियों को लेकर स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा कि किसी अधिकारी के निर्णय की आलोचना की जा सकती है, लेकिन व्यक्तिगत स्तर पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल और लगातार ट्रोलिंग उचित नहीं है।
दरअसल, पिछले दिनों शुक्रवार की परेड के बाद आयोजित ऑर्डर्ली रूम को लेकर सोशल मीडिया पर तरह-तरह की टिप्पणियां सामने आई थीं। कुछ सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मियों के लिए सूती वर्दी और अन्य व्यवस्था के नाम पर अतिरिक्त खर्च कराया गया। इसी को लेकर एसएसपी नीरज जादौन को सोशल मीडिया पर ट्रोल किया जा रहा था। कुछ टिप्पणियों में उनके लिए कथित तौर पर ‘राजा साहब’ जैसी भाषा का भी इस्तेमाल किया गया।
मामले को लेकर एसएसपी नीरज जादौन ने सोशल मीडिया मंच पर एक हस्तलिखित संदेश साझा किया। उन्होंने कहा कि वह पूरी ईमानदारी, जिम्मेदारी और नियम-कायदों के तहत अपने दायित्वों का निर्वहन करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सोशल मीडिया पर होने वाली टिप्पणियों का असर केवल अधिकारी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसका प्रभाव परिवार के सदस्यों पर भी पड़ता है।
एसएसपी ने स्पष्ट किया कि शुक्रवार की परेड के बाद ऑर्डर्ली रूम में उपस्थित होना एसएसपी के लिए अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि वहां सूती वर्दी पहनने का नियम है। ये नियम उन्होंने नहीं बनाए हैं और न ही उन्हें बदलने का अधिकार उनके पास है। उन्होंने कहा कि वह अपनी नौकरी और जिम्मेदारी के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं तथा निर्धारित नियमों के अनुसार ही कार्य करते हैं।
सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ की जा रही टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए नीरज जादौन ने कहा कि उन्होंने कभी स्वयं को राजा समझकर काम नहीं किया। उनका हमेशा प्रयास रहा है कि उन्हें जो जिम्मेदारी सौंपी गई है, उसका पूरी ईमानदारी और नियमों के अनुसार निर्वहन करें। उन्होंने कहा कि अधिकारी के तौर पर लिए गए फैसलों की आलोचना अपनी जगह हो सकती है, लेकिन किसी अधिकारी के साथ व्यक्तिगत स्तर पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल करना उचित नहीं है।
एसएसपी ने सोशल मीडिया के मौजूदा दौर का जिक्र करते हुए कहा कि आज लगभग हर व्यक्ति किसी न किसी रूप में सोशल मीडिया से जुड़ा हुआ है। ऐसे में किसी अधिकारी पर लगातार की जाने वाली टिप्पणियों का असर उसके परिवार तक भी पहुंच सकता है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या केवल अपना काम करने और नियमों का पालन करने के लिए किसी व्यक्ति को गाली देना या लगातार ट्रोल करना उचित है।
अपने भावुक संदेश में एसएसपी नीरज जादौन ने कहा कि वह पूरे जुनून और समर्पण के साथ अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं। उन्होंने कहा कि जिस दिन उन्हें महसूस होगा कि वह अपने दायित्वों के साथ न्याय नहीं कर पा रहे हैं, उसी दिन बिना किसी हिचकिचाहट के अपने पद से इस्तीफा दे देंगे। उन्होंने कहा कि वह भी एक इंसान हैं और लगातार होने वाली ट्रोलिंग का उन पर भी असर पड़ता है।
एसएसपी के इस भावुक संदेश के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर उनके बयान को लेकर चर्चा तेज हो गई है। ऑर्डर्ली रूम और वर्दी से जुड़े नियमों को लेकर उठे विवाद के बीच एसएसपी ने जहां अपनी स्थिति स्पष्ट की है, वहीं व्यक्तिगत टिप्पणियों और अभद्र भाषा से बचने की अपील भी की है।




