13 साल बाद ‘मुर्दा’ आरोपी सड़क पर चलाता मिला स्कूटर! आगरा कोर्ट ने फोटो देखते ही भेजा जेल
आगरा में फर्जी वसीयत के मामले से बचने के लिए खुद को मृत घोषित करने का आरोप झेल रहे ताराचंद शर्मा ने सोमवार को अदालत में आत्मसमर्पण किया।

आगरा/उत्तर प्रदेश। फर्जी वसीयत के मामले में कार्रवाई से बचने के लिए करीब 13 वर्ष पहले खुद को मृत घोषित कराने का आरोपी आखिरकार सोमवार को अदालत में पहुंच गया। आरोप है कि ताराचंद शर्मा ने वर्ष 1998 का फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र अदालत में प्रस्तुत कर स्वयं को मृत साबित करने का प्रयास किया था। मामले की सच्चाई सामने आने के बाद आरोपी ने अदालत में आत्मसमर्पण कर जमानत की अर्जी दाखिल की, जिसे न्यायिक मजिस्ट्रेट शिवानंद गुप्ता ने खारिज करते हुए उसे जेल भेजने के आदेश दिए।
मामला वर्ष 1999 से अदालत में विचाराधीन था। वादी विद्या देवी की ओर से चुन्नीलाल गोयल, रामकुमार वर्मा, रोशनलाल वर्मा और ताराचंद शर्मा के खिलाफ फर्जी वसीयत तैयार करने का परिवाद दाखिल किया गया था। मुकदमे की सुनवाई के दौरान चुन्नीलाल गोयल और रोशनलाल वर्मा की मृत्यु हो गई।
इसी दौरान आरोप है कि ताराचंद शर्मा ने वर्ष 1998 का फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र अदालत में दाखिल कर खुद को मृत घोषित कर दिया। वर्ष 2013 में अदालत ने उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर ताराचंद शर्मा को मृत मानते हुए उसके खिलाफ चल रही कार्यवाही बंद कर दी।
मामले में नया मोड़ नवंबर 2025 में आया, जब वादी ने ताराचंद शर्मा को गांधी नगर में स्कूटर चलाते हुए देखा। संदेह होने पर वादी ने उसकी तस्वीर भी खींच ली। इसके बाद मामले में फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र के जरिए अदालत को गुमराह किए जाने का आरोप सामने आया।
वादी ने अधिवक्ता समीर भटनागर के माध्यम से पुलिस से शिकायत की। पुलिस की ओर से कार्रवाई नहीं होने पर अदालत का रुख किया गया। अदालत के आदेश पर नौ मार्च को तत्कालीन थाना प्रभारी समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। इसके बाद थाना न्यू आगरा पुलिस ने मामले की जांच शुरू की।
जांच के दौरान उपनिरीक्षक मधुर चतुर्वेदी की रिपोर्ट में ताराचंद शर्मा के जीवित होने की पुष्टि होने की बात सामने आई। पुलिस के अनुसार वह अपने घर पर मौजूद मिले। उनके बेटे आशुतोष शर्मा ने भी बयान दिया कि उनके पिता जीवित हैं और घर पर ही रहते हैं। वह कभी-कभी स्कूटर से बाहर भी जाते हैं। पुलिस ने ताराचंद शर्मा और उनके बेटे की तस्वीरें भी लीं, जिन्हें अदालत में साक्ष्य के तौर पर प्रस्तुत किया गया।
पुलिस जांच और सामने आए तथ्यों के बाद ताराचंद शर्मा, निवासी नगला बेनी प्रसाद, गांधी नगर, ने सोमवार को अदालत में आत्मसमर्पण किया। उन्होंने जमानत के लिए प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया। न्यायिक मजिस्ट्रेट शिवानंद गुप्ता ने मामले की सुनवाई के बाद जमानत अर्जी खारिज कर दी और आरोपी को जेल भेजने के आदेश दिए।




