दिव्यांग छात्रों से मुफ्त भोजन के बदले हर महीने वसूले 2 से 3 हजार रुपए, कोर्ट के आदेश पर केस दर्ज
जिस भोजन के लिए दिव्यांग छात्रों से एक रुपया भी नहीं लिया जाना था, उसी के नाम पर हर महीने हजारों रुपए वसूलने का आरोप लगा है। इंदौर के सरकारी आईटीआई में गेस्ट फैकल्टी पर छात्रों से 2 से 3 हजार रुपये मासिक लेने और शनिवार-रविवार के खाने के लिए अलग से 500-700 रुपये वसूलने का आरोप है। शिकायत पुलिस तक पहुंची, कार्रवाई नहीं हुई तो मामला कोर्ट गया और अब एफआईआर दर्ज हुई है।

इंदौर/मध्य प्रदेश। शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान में दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए संचालित निशुल्क भोजन व्यवस्था को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। शिकायतकर्ता छात्रा अंजू कोहली की शिकायत पर अदालत के निर्देश के बाद हीरा नगर पुलिस ने गेस्ट फैकल्टी इंद्रा जाटव के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पुलिस अब विद्यार्थियों के बयान, भोजन व्यवस्था से जुड़े दस्तावेज और कथित भुगतान के रिकॉर्ड की जांच कर रही है।
आरोप है कि शासन की ओर से दिव्यांग छात्र-छात्राओं के लिए उपलब्ध कराई जा रही निशुल्क भोजन सुविधा के बदले विद्यार्थियों से नियमित रूप से रकम ली जा रही थी। शिकायत के मुताबिक, गेस्ट फैकल्टी के रूप में कार्यरत महिला विद्यार्थियों से कथित तौर पर हर महीने दो से तीन हजार रुपये लेती थी।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि शनिवार और रविवार को भोजनालय बंद रहने के दौरान विद्यार्थियों को भोजन उपलब्ध कराने के नाम पर अलग से रकम वसूली जाती थी। इसके लिए कथित तौर पर प्रत्येक विद्यार्थी से 500 से 700 रुपये तक लिए जाते थे।
मामले में शिकायतकर्ता छात्रा अंजू कोहली ने पुलिस के समक्ष शिकायत की थी। आरोप है कि शिकायत के बावजूद जब पुलिस स्तर पर कार्रवाई नहीं हुई तो छात्रा ने अधिवक्ता के माध्यम से अदालत का दरवाजा खटखटाया। मामले में उपलब्ध तथ्यों और आरोपों पर सुनवाई के बाद अदालत ने पुलिस को प्रकरण दर्ज कर जांच के निर्देश दिए।
अदालत के निर्देश के बाद हीरा नगर पुलिस ने इंद्रा जाटव पत्नी अनिल जाटव, निवासी राजीव आवास विहार के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया है। पुलिस के अनुसार मामला अमानत में खयानत से संबंधित धाराओं के तहत दर्ज किया गया है। हालांकि आरोपों की वास्तविकता जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
मामला दर्ज होने के बाद पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि कथित तौर पर विद्यार्थियों से कितने समय से रकम ली जा रही थी और कुल कितनी राशि का लेन-देन हुआ। पुलिस विद्यार्थियों के बयान दर्ज करने के साथ भोजन व्यवस्था से संबंधित अभिलेख और भुगतान से जुड़े दस्तावेज भी खंगाल रही है।
जांच में यह भी देखा जाएगा कि भोजन व्यवस्था के लिए शासन की ओर से क्या प्रावधान किए गए थे और उसके तहत विद्यार्थियों को किस प्रकार की सुविधा उपलब्ध कराई जानी थी। यदि जांच में विद्यार्थियों से निशुल्क भोजन के बदले रकम वसूले जाने के आरोप सही पाए जाते हैं तो मामले में जिम्मेदारी तय की जा सकती है।
मामले ने सरकारी संस्थानों में दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए संचालित कल्याणकारी योजनाओं की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल पुलिस की जांच जारी है और विद्यार्थियों के बयान तथा उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर पूरे प्रकरण की वास्तविक स्थिति सामने आने की उम्मीद है।




