‘महाराष्ट्र में योगी आदित्यनाथ बनने की कोशिश न करें फडणवीस’, अभिजीत दिपके ने 10 अक्टूबर के प्रदर्शन को लेकर पुलिस नोटिस पर उठाए सवाल
सीजेपी प्रमुख अभिजीत दिपके ने प्रदर्शनकारियों से आग्रह किया कि अगर पुलिस या बीजेपी के गुंडे हमला करते हैं, तो वे गांधीवादी सिद्धांतों का पालन करते हुए और 'रघुपति राघव राजा राम' भजन गाते हुए अपने आंदोलन को और तेज करें। इस दौरान उन्होंने महाराष्ट्र सीएम पर हमला बोला।

छत्रपति संभाजीनगर,महाराष्ट्र। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने मंगलवार को महाराष्ट्र पुलिस और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर निशाना साधते हुए 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर पुलिस की ओर से कार्यकर्ताओं को जारी नोटिस पर सवाल उठाए। दीपके ने आरोप लगाया कि चंद्रपुर पुलिस ने सीजेपी कार्यकर्ताओं को नोटिस भेजकर उन्हें दिल्ली में होने वाले प्रदर्शन में शामिल नहीं होने की सलाह दी है और यात्रा के खर्च के स्रोत के बारे में भी जानकारी मांगी है।
संभाजीनगर में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में दीपके ने कहा कि महाराष्ट्र पुलिस को देश की बेहतरीन पुलिस बलों में गिना जाता है और उसकी तुलना कई बार स्कॉटलैंड यार्ड से की जाती है। इसके बावजूद प्रदर्शन में शामिल होने वाले लोगों को नोटिस जारी किया जाना चिंता का विषय है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस के इस रवैये का उद्देश्य प्रदर्शनकारियों का मनोबल कमजोर करना है। हालांकि, पुलिस की ओर से इन आरोपों पर तत्काल कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
दीपके ने मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री देवेंद्र फडणवीस पर भी राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कार्यशैली की नकल करने की कोशिश कर रही है। दीपके ने कहा कि महाराष्ट्र की अपनी राजनीतिक और सामाजिक परिस्थितियां हैं और यहां के लोकतांत्रिक माहौल को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
उन्होंने ‘एक देश, एक चुनाव’ के प्रस्ताव को लेकर भी भाजपा सरकार पर निशाना साधा। दीपके ने दावा किया कि ‘एक देश, एक चुनाव’ केवल नारा है और सरकार की मंशा आगे चलकर ‘एक देश, एक राजनीतिक दल’ की दिशा में जाने की है। यह उनका राजनीतिक आरोप है, जिस पर सत्तारूढ़ पक्ष की प्रतिक्रिया इस बयान में उपलब्ध नहीं है।
दीपके ने चंद्रपुर पुलिस की ओर से कथित तौर पर जारी नोटिस का हवाला देते हुए कहा कि पुलिस ने प्रदर्शन में संभावित हिंसा की आशंका जताई है। उन्होंने सवाल उठाया कि किसी प्रस्तावित प्रदर्शन को पहले से हिंसक मानने का आधार क्या है। उन्होंने सोशल मीडिया पर ऐसे पोस्ट से बचने की कथित पुलिस सलाह पर भी सवाल उठाया, जिनसे हिंसा भड़कने की आशंका बताई गई है। दीपके ने कहा कि सीजेपी शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने की बात करती रही है और महात्मा गांधी तथा डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचारों का उल्लेख करते हुए अपने आंदोलन को अहिंसक बताते हैं।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि महाराष्ट्र के किसी नागरिक के दिल्ली जाकर प्रदर्शन में शामिल होने पर स्थानीय पुलिस को उसके यात्रा खर्च के स्रोत के बारे में पूछताछ क्यों करनी चाहिए। दीपके के मुताबिक, यदि कोई कार्यकर्ता अपने निजी संसाधनों से दिल्ली जाता है तो इस पर आपत्ति का आधार स्पष्ट होना चाहिए। उन्होंने पुलिस के इस कथित रवैये को लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा मुद्दा बताया।
दीपके ने पिछले सप्ताह घोषणा की थी कि यदि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते हैं तो सीजेपी की ओर से 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया जाएगा। इससे पहले दो अक्टूबर को मुंबई के शिवाजी पार्क में भी संगठन की ओर से प्रदर्शन किए जाने का दावा किया गया था। प्रस्तावित प्रदर्शन में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर सवाल उठाने की बात कही गई है।
विपक्षी दलों की ओर से एसआईआर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और निर्वाचन आयोग के भीतर मतभेद को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। दूसरी ओर, निर्वाचन आयोग ने आयुक्तों के बीच मतभेद की खबरों को खारिज करते हुए कहा है कि एसआईआर से जुड़े फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं। ऐसे में 10 अक्टूबर को प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक गतिविधियां और पुलिस-प्रशासन की तैयारियां दोनों पर नजर बनी हुई है।




