महुआ मोइत्रा का आरोप, अमित शाह के बंगाल दौरों में मुस्लिम अधिकारियों को बैठकों से दूर रखा गया
महुआ मोइत्रा ने बड़े दावे किए हैं। उनका कहना है कि बंगाल में अमित शाह की जो मीटिंग होती हैं, उनमें मुस्लिम अफसरों को बाहर कर दिया जाता है। उन्होंने बीते कुछ बैठकों का हवाला दिया, जिनसे मुस्लिम आईएएस और आईपीएस को बाहर कर दिया गया।

कोलकाता,एजेंसी। तृणमूल कांग्रेस की कृष्णानगर सांसद महुआ मोइत्रा ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के जुलाई और अगस्त 2026 के पश्चिम बंगाल दौरों के दौरान तीन वरिष्ठ मुस्लिम अधिकारियों को आधिकारिक बैठकों और कार्यक्रमों से कथित रूप से दूर रखे जाने का आरोप लगाया है। उन्होंने 16 सितंबर को राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग और संयुक्त राष्ट्र के अल्पसंख्यक मामलों के विशेष प्रतिवेदक को पत्र भेजकर मामले की जांच और संबंधित अभिलेख सुरक्षित रखने की मांग की है।
मोइत्रा ने अपने पत्र में सिलीगुड़ी के पुलिस आयुक्त सैयद वकार रजा, राज्य विशेष कार्यबल के महानिदेशक जावेद शमीम और अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव खलील अहमद के नाम का उल्लेख किया है। उनका आरोप है कि जुलाई और अगस्त में अमित शाह के पश्चिम बंगाल दौरों के दौरान इन अधिकारियों को बैठकों या आधिकारिक कार्यक्रमों में शामिल होने से रोका गया अथवा कार्यक्रम स्थल से जाने को कहा गया। मोइत्रा ने इन घटनाओं को धर्म के आधार पर भेदभाव से जोड़ते हुए सवाल उठाया है।
मोइत्रा के अनुसार, 18 जुलाई को सिलीगुड़ी में भारत-बांग्लादेश सीमा की सुरक्षा को लेकर हुई समीक्षा बैठक में सिलीगुड़ी पुलिस आयुक्त सैयद वकार रजा पहुंचे थे, लेकिन उन्हें कथित तौर पर वहां से जाने के लिए कहा गया। उन्होंने दावा किया कि रजा को गृह मंत्री के स्वागत और विदाई के लिए तय औपचारिक व्यवस्था से भी अलग रखा गया और उनकी जगह उत्तर बंगाल के पुलिस महानिरीक्षक सुकेश कुमार जैन को जिम्मेदारी दी गई। इसी बैठक में विशेष कार्यबल के प्रमुख जावेद शमीम की जगह उनके अधीनस्थ अधिकारी गौरव शर्मा के मौजूद रहने का भी दावा किया गया है।
मोइत्रा ने 19 जुलाई को कोलकाता में कानून-व्यवस्था और आपदा प्रबंधन को लेकर हुई बैठक का भी उल्लेख किया है। उनके अनुसार, अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव खलील अहमद बैठक में पहुंचे थे, लेकिन उन्हें कथित तौर पर जाने के लिए कहा गया। उन्होंने दावा किया कि जावेद शमीम को भी बैठक में शामिल नहीं होने दिया गया और विशेष कार्यबल का प्रतिनिधित्व फिर गौरव शर्मा ने किया।
मोइत्रा के पत्र में अगस्त में अमित शाह के दूसरे पश्चिम बंगाल दौरे के दौरान भी इसी तरह की घटनाओं का आरोप लगाया गया है। उनके अनुसार, सैयद वकार रजा को सिलीगुड़ी में सीमा सुरक्षा समीक्षा बैठक तथा गृह मंत्री के स्वागत और विदाई से जुड़ी व्यवस्थाओं से अलग रखा गया, जबकि जावेद शमीम को नए आपराधिक कानूनों से संबंधित प्रदर्शनी में शामिल नहीं होने दिया गया।
हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार मोइत्रा के पत्रों में इन घटनाओं का विवरण और संबंधित सामग्री दी गई है, लेकिन अधिकारियों के स्वयं के बयान अथवा उन्हें बैठकों से बाहर रखने के लिखित आदेश की प्रतियां शामिल नहीं हैं। उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर यह भी स्पष्ट नहीं है कि संबंधित अधिकारियों की उपस्थिति के संबंध में निर्णय किस कारण से लिए गए थे। पश्चिम बंगाल सरकार या संबंधित अधिकारियों की ओर से आरोपों पर स्पष्ट सार्वजनिक प्रतिक्रिया की पुष्टि भी उपलब्ध रिपोर्टों में नहीं हुई है।
मोइत्रा ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए संबंधित बैठकों के अभिलेख, दौरा विवरण और अन्य आधिकारिक रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का आग्रह किया है। फिलहाल अधिकारियों को बैठकों से दूर रखने के कारणों और मोइत्रा द्वारा लगाए गए धर्म आधारित भेदभाव के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।




