‘शुद्ध’ पेट्रोल की नहीं होगी वापसी, ई20 पूरी तरह सुरक्षित, सरकार ने साफ किया रुख
देशभर में ई20 पेट्रोल को लेकर चल रहे बवाल के बीच गुरुवार को केंद्र सरकार ने इस मामले में अपना रुख साफ कर दिया है। सरकार ने लिखित जवाब में बताया कि ई20 पेट्रोल पूरी तरह से सुरक्षित है और इसे वापस नहीं लिया जाएगा।

नई दिल्ली/एजेंसी। सोशल मीडिया पर ई20 पेट्रोल को लेकर फैल रही आशंकाओं के बीच केंद्र सरकार ने संसद में स्पष्ट किया है कि यह ईंधन पूरी तरह सुरक्षित, स्वच्छ और आधुनिक है तथा इससे वाहनों के इंजन को कोई नुकसान नहीं होता। सरकार ने यह भी साफ कर दिया है कि बिना इथेनॉल वाले पुराने पेट्रोल पर वापस लौटने का उसका कोई इरादा नहीं है।
केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने संसद में लिखित जवाब के माध्यम से बताया कि ई20 पेट्रोल देश की ऊर्जा नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है और सरकार का लक्ष्य आधुनिक एवं पर्यावरण अनुकूल तकनीक को बढ़ावा देना है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल 20 प्रतिशत से अधिक इथेनॉल मिश्रण बढ़ाने की कोई योजना नहीं है।
सरकार द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, भारत ने पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य निर्धारित समय से पांच वर्ष पहले ही प्राप्त कर लिया है। वर्ष 2022-23 में जहां औसतन 12 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण था, वहीं 2023-24 में यह बढ़कर 14.6 प्रतिशत, 2024-25 में 19.2 प्रतिशत और 2025-26 में 20 प्रतिशत तक पहुंच गया।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि ई85 ईंधन, जिसमें 85 प्रतिशत इथेनॉल होता है, केवल विशेष फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए है और इसे सामान्य पेट्रोल पंपों पर उपलब्ध नहीं कराया जाता।
ई20 पेट्रोल से इंजन खराब होने के दावों को खारिज करते हुए सरकार ने कहा कि नीति आयोग और अन्य संस्थाओं के अध्ययन में ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला है। एक प्रमुख वाहन निर्माता कंपनी द्वारा वर्ष 2025-26 में लगभग 2.84 करोड़ वाहनों की सर्विसिंग के दौरान भी इथेनॉल के कारण इंजन खराब होने की कोई शिकायत दर्ज नहीं हुई। वर्तमान में देश में 20 करोड़ से अधिक दोपहिया वाहन और 3 करोड़ से अधिक कारें ई15 और ई20 ईंधन पर बिना किसी समस्या के चल रही हैं।
माइलेज के संबंध में सरकार ने बताया कि पुरानी, ई10 मानक की गाड़ियों में ई20 के उपयोग से 3 से 5 प्रतिशत तक की मामूली कमी आ सकती है, जो वाहन के उपयोग और रखरखाव पर भी निर्भर करती है। वहीं, ई20 का ऑक्टेन स्तर अधिक होने से इंजन की कार्यक्षमता और पिकअप में सुधार देखा जाता है।
सरकार ने इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम के आर्थिक और पर्यावरणीय लाभों पर भी प्रकाश डाला। कच्चे तेल के आयात में कमी से देश को लगभग दो लाख करोड़ रुपये की बचत हुई है, जबकि कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में भी उल्लेखनीय कमी आई है। इसके अतिरिक्त, इथेनॉल की आपूर्ति से देश के किसानों को 1.66 लाख करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान प्राप्त हुआ है।




