ड्रग्स के खिलाफ भारत की ‘जीरो-टॉलरेंस पॉलिसी’, समुद्र और डार्कनेट के तस्करों पर कड़े प्रहार की तैयारी

गुवाहाटी में ब्रिक्स देशों की एंटी-ड्रग एजेंसियों की बैठक में भारत ने मादक पदार्थों की तस्करी से निपटने के लिए एक समर्पित 'ब्रिक्स वर्चुअल वर्किंग ग्रुप' बनाने का प्रस्ताव रखा है।

गुवाहाटी/एजेंसी। गुवाहाटी में सोमवार को ब्रिक्स देशों की एंटी-ड्रग एजेंसियों के प्रमुखों की दो दिवसीय बैठक का आगाज हुआ। इस महत्वपूर्ण मंच से भारत ने मादक पदार्थों की तस्करी की उभरती वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए एक समर्पित ‘ब्रिक्स वर्चुअल वर्किंग ग्रुप’ बनाने का बड़ा और दूरदर्शी प्रस्ताव रखा है।
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) के महानिदेशक अनुराग गर्ग ने उद्घाटन सत्र में चिंता व्यक्त करते हुए कहा, “आधुनिक और बेहद जटिल तस्करी के तरीकों ने कभी स्थानीय रही इस समस्या को अब एक आपस में जुड़े वैश्विक खतरे में बदल दिया है।”
उन्होंने जोर देकर कहा कि 21वीं सदी के ड्रग तस्कर न तो सीमाओं का सम्मान करते हैं और न ही संप्रभुता का। ऐसे में उनसे निपटने के लिए कानून प्रवर्तन एजेंसियों को पारंपरिक बाधाओं को तोड़कर आपसी विश्वास और रीयल-टाइम सहयोग के साथ काम करना होगा।
एनसीबी प्रमुख ने आगाह किया कि तस्कर अब समुद्री रास्तों से भारी मात्रा में ड्रग्स दुनिया के कोने-कोने में पहुंचा रहे हैं। इसके लिए हमें ‘स्थानीय पुलिसिंग’ से ऊपर उठकर एक आक्रामक ‘समुद्री रणनीति’ अपनानी होगी। इसके साथ ही बैठक में डार्कनेट, डिजिटल तकनीकों और न्यू साइकोएक्टिव सब्सटेंस के दुरुपयोग को रोकने के लिए विशेष सत्र रखे गए हैं।
भारत के रुख को स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि देश में ड्रग्स के खिलाफ ‘जीरो-टॉलरेंस पालिसी’ को संस्थागत रूप दिया गया है। भारत के लिए इसका मतलब ड्रग सिंडिकेट्स की वित्तीय कमर तोड़ना और संपत्तियों को जब्त करना है। हालांकि, नशे के शिकार पीड़ितों के प्रति भारत का नजरिया मानवीय है।
गर्ग ने कहा, “हम लत को सिर्फ कानून-व्यवस्था की विफलता नहीं मानते, बल्कि पीड़ितों को समाज की मुख्यधारा में वापस लाने के लिए होलिस्टिक रिकवरी मॉडल पर काम कर रहे हैं।”मीडिया से बात करते हुए महानिदेशक ने साफ किया कि अब सीमा पार ड्रग्स लाने वाले छोटे कूरियरों के बजाय अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के मुख्य सरगनाओं को दबोचने पर पूरा ध्यान केंद्रित है।
म्यांमार से आ रही हेरोइन और मेथामफेटामाइन के संदर्भ में उन्होंने बताया कि कुछ बड़े खिलाड़ियों की पहचान कर ली गई है और उन्हें कानून के दायरे में लाने की प्रक्रिया जारी है। इसके लिए पूर्वोत्तर में एनसीबी ने अपनी क्षमता बढ़ाई है और राज्यों में एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स को मजबूत किया जा रहा है।

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