गाजियाबाद में कार में चल रहा था अवैध अल्ट्रासाउंड सेंटर, चार आरोपी गिरफ्तार; पोर्टेबल मशीन व नकदी बरामद

गाजियाबाद में स्वास्थ्य विभाग और पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है जो कार में पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीन से भ्रूण लिंग परीक्षण करता था।

गाजियाबाद। स्वास्थ्य विभाग, पुलिस और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ने एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो कार को ही अवैध अल्ट्रासाउंड सेंटर बनाकर भ्रूण लिंग जांच करता था। शनिवार रात की गई कार्रवाई में टीम ने गिरोह के चार सदस्यों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीन और नकदी बरामद की है।
जानकारी के अनुसार आरोपित पोर्टेबल चीनी अल्ट्रासाउंड मशीन के माध्यम से कार में ही भ्रूण का लिंग परीक्षण करते थे और इसके लिए करीब 20 हजार रुपये वसूलते थे। जरूरत पड़ने पर वे अवैध गर्भपात की व्यवस्था भी कराते थे। पुलिस को आशंका है कि इस गिरोह का नेटवर्क कई डॉक्टरों और झोलाछाप चिकित्सकों तक फैला हुआ है।
स्वास्थ्य विभाग को मिली सूचना के आधार पर टीम ने महामाया स्टेडियम फ्लाईओवर के पास एक अर्टिगा कार में महिला का इंतजार कर रहे चारों आरोपितों को पकड़ लिया। कार की तलाशी लेने पर चीन निर्मित पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीन, प्रोब, जेल, पावर सप्लाई उपकरण और 20 हजार रुपये नकद बरामद हुए।
पूछताछ में खुलासा हुआ कि दलालों के जरिए गर्भवती महिलाओं से संपर्क किया जाता था और तय स्थान पर कार के भीतर ही अल्ट्रासाउंड कर भ्रूण का लिंग बता दिया जाता था, ताकि किसी अस्पताल या क्लीनिक में कोई रिकॉर्ड न बन सके। दलालों को प्रत्येक महिला भेजने के बदले तीन हजार रुपये दिए जाते थे।
गिरफ्तार आरोपितों की पहचान बागपत के चांदीनगर क्षेत्र के गठी कलंजरी निवासी संदीप, बुलंदशहर के स्याना क्षेत्र के खानपुर निवासी तस्लीम उर्फ साहिल राणा, हापुड़ के गढ़मुक्तेश्वर क्षेत्र के सरूपुर निवासी सलमान और नूरनगर निवासी साहिद अहमद के रूप में हुई है। मुख्य आरोपी संदीप पहले भी अवैध भ्रूण लिंग जांच के मामले में गिरफ्तार होकर जेल जा चुका है।
पुलिस पूछताछ में पता चला है कि यह गिरोह पिछले करीब दो वर्षों से सक्रिय था और नर्सिंग होम तथा अस्पतालों के नेटवर्क के जरिए गर्भवती महिलाओं तक पहुंच बनाता था। पुलिस ने आरोपितों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता, पीसीपीएनडीटी एक्ट और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग अधिनियम की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है।
एसीपी कोतवाली उपासना पांडेय के अनुसार, गिरोह से जुड़े डॉक्टरों, बिचौलियों और अन्य सहयोगियों की भूमिका की जांच की जा रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि अब तक कितनी महिलाओं की अवैध लिंग जांच की गई और कितने मामलों में अवैध गर्भपात कराया गया।

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