डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर दिल्ली में कार्यक्रम का आयोजन, भाजपा नेताओं ने दी श्रद्धांजलि

नई दिल्ली। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जन्म जयंती के अवसर पर दिल्ली भाजपा नेताओं ने प्रदेश अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा के नेतृत्व में शहीदी पार्क स्थित उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की और वृक्षारोपण किया। इस अवसर पर शाम को उनकी स्मृति में युवा सम्मेलन एवं व्याख्यान माला का आयोजन भी किया गया।
दिल्ली भाजपा द्वारा सिविक सेंटर स्थित केदार नाथ साहनी सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्घाटन केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने दीप प्रज्वलन कर किया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता सहित अनेक वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।
पुष्पांजलि अर्पित करने वालों में संगठन महामंत्री पवन राणा, विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता, उपाध्यक्ष मोहन सिंह बिष्ट, मंत्री प्रवेश साहिब सिंह, सांसद मनोज तिवारी, रामवीर सिंह बिधूड़ी, योगेंद्र चांदोलिया, बाँसुरी स्वराज, महापौर प्रवेश वाही, उपमहापौर मोनिका पंत, महामंत्री विष्णु मित्तल, पूर्व अध्यक्ष वीरेन्द्र सचदेवा, डॉ. हर्षवर्धन और आदेश गुप्ता सहित अनेक पदाधिकारी और युवा मोर्चा कार्यकर्ता शामिल रहे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए हर्ष मल्होत्रा ने कहा कि डॉ. मुखर्जी का जीवन राष्ट्रवाद, शिक्षा और बलिदान का अद्वितीय उदाहरण है। उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी ने मात्र 33 वर्ष की आयु में कलकत्ता विश्वविद्यालय के सबसे कम उम्र के कुलपति बनकर शिक्षा क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया और बाद में देश की एकता और अखंडता के लिए संघर्ष किया।
उन्होंने बताया कि डॉ. मुखर्जी ने 1950 में नेहरू-लियाकत समझौते का विरोध करते हुए मंत्री पद से इस्तीफा दिया और 1951 में भारतीय जनसंघ की स्थापना की। जम्मू-कश्मीर में विशेष प्रावधानों के विरोध में उन्होंने “एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान” के खिलाफ आंदोलन किया और इसी संघर्ष के दौरान 1953 में उनका निधन हो गया।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अपने संबोधन में कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने स्वतंत्र भारत की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में अलग व्यवस्था के विरोध में उनका संघर्ष ऐतिहासिक था और आज उनके सपनों को साकार करने की दिशा में देश आगे बढ़ रहा है।
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि डॉ. मुखर्जी एक महान शिक्षाविद और दूरदर्शी नेता थे, जिन्होंने राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखा। उन्होंने कहा कि देश की एकता और अखंडता के लिए उनका योगदान सदैव प्रेरणादायक रहेगा। कार्यक्रम में वक्ताओं ने डॉ. मुखर्जी के विचारों को राष्ट्र निर्माण के लिए मार्गदर्शक बताते हुए उनके बताए रास्ते पर चलने का आह्वान किया।

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