एक मानसून भी नहीं झेल पाया 6695 करोड़ रुपये का मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे, भूस्खलन से बंद हुआ मार्ग; निर्माण गुणवत्ता और संभावित भ्रष्टाचार पर उठे सवाल

मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे का 6695 करोड़ रुपये का 'मिसिंग लिंक' प्रोजेक्ट उद्घाटन के दो महीने बाद ही भारी बारिश और भूस्खलन के कारण बंद हो गया। इस घटना ने परियोजना की सुरक्षा और इंजीनियरिंग मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मुंबई/एजेंसी। महाराष्ट्र में मानसून के तेज़ तेवरों ने जहां भीषण गर्मी से राहत दी, वहीं अब यह राहत कई जगह आफत में बदलती नजर आ रही है। राज्य के कई हिस्सों में भारी बारिश और भूस्खलन की घटनाओं ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। इसी बीच देश के सबसे आधुनिक और महंगे प्रोजेक्ट्स में गिने जाने वाले मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
सोमवार तड़के करीब 3:30 बजे ‘मिसिंग लिंक’ टनल के पास भारी भूस्खलन होने से प्रशासन को मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे और पुराने हाईवे, दोनों मार्गों को पूरी तरह बंद करना पड़ा। लगातार बारिश और मलबा गिरने के कारण यातायात ठप हो गया, जिससे हजारों वाहन फंस गए। महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम के अनुसार, खालापूर टोल प्लाजा के पास मलबा हटाने में 3 से 5 घंटे का समय लगा, जिसके बाद दोपहर तक मार्ग आंशिक रूप से खोला जा सका।
हैरानी की बात यह है कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने महज नौ सप्ताह पहले, 1 मई 2026 को इस 6695 करोड़ रुपये की लागत वाले फ्लैगशिप प्रोजेक्ट का उद्घाटन किया था। उद्घाटन के कुछ ही समय बाद इस एक्सप्रेसवे पर गड्ढे दिखाई देने लगे थे, जिसके बाद ठेकेदार को नियमित निगरानी के निर्देश दिए गए थे। अब भूस्खलन की घटना ने इस प्रोजेक्ट की निर्माण गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
इस परियोजना को खंडाला घाट जैसे दुर्घटना संभावित क्षेत्र से बचाव और यात्रा समय में 20 से 30 मिनट की कमी लाने के उद्देश्य से तैयार किया गया था। साथ ही, यह कॉरिडोर देश की सबसे चौड़ी सुरंगों और ऊंचे केबल-स्टे ब्रिज पिलर्स के लिए चर्चित रहा है। बावजूद इसके, मानसून की शुरुआती बारिश में ही इसकी खामियां सामने आना चिंता का विषय बन गया है। बारिश का असर रेल यातायात पर भी पड़ा है। कर्जत-लोनावला सेक्शन में ठाकुरवाड़ी और मंकी हिल के बीच भूस्खलन के चलते सेंट्रल रेलवे को डेक्कन क्वीन, डेक्कन एक्सप्रेस, प्रगति एक्सप्रेस, सिंहगढ़ एक्सप्रेस और इंद्रायणी एक्सप्रेस समेत कई ट्रेनों को रद्द करना पड़ा, जबकि कुछ लंबी दूरी की ट्रेनों के रूट डायवर्ट किए गए।
मौसम विभाग ने मुंबई और आसपास के क्षेत्रों के लिए रेड अलर्ट जारी किया है। बीते 24 घंटों में औसतन 105.24 मिमी बारिश दर्ज की गई है और 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने का अनुमान जताया गया है।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब निर्माण कार्य में संभावित लापरवाही और भ्रष्टाचार के आरोप भी उठने लगे हैं। विशेषज्ञों और विपक्षी दलों का कहना है कि इतनी बड़ी लागत वाले प्रोजेक्ट में यदि शुरुआती चरण में ही गड्ढे और भूस्खलन जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं, तो निर्माण गुणवत्ता, सामग्री के उपयोग और निगरानी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच आवश्यक है। कुछ सूत्रों का यह भी कहना है कि निर्माण कार्य में मानकों से समझौता या वित्तीय अनियमितताओं की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
हालांकि, संबंधित एजेंसियों ने अभी तक किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या भ्रष्टाचार के आरोपों की पुष्टि नहीं की है। लेकिन लगातार सामने आ रही घटनाओं ने यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि क्या इतने बड़े और महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट में गुणवत्ता और सुरक्षा के मानकों का पूरी तरह पालन किया गया था। अब निगाहें सरकार और जांच एजेंसियों पर हैं कि वे इस मामले की गहराई से जांच कर सच्चाई सामने लाती हैं या नहीं।

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