कांकेर के मासपुर गांव में जिंदा रहने के लिए जान खतरे में डाल रहे ग्रामीण, एक कुंड से सहारे पीने को मिल रहा पानी

छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के मासपुर गांव में लोगों को पीने के पानी का संकट है। इस गांव के लोग एक कुंड से सहारे पानी पी रहे हैं। इस कुंड में जानवर भी पानी पीते हैं।

कांकेर/छत्तीसगढ़। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में इन दिनों पेयजल संकट गहराता जा रहा है। कई गांवों में हालात ऐसे हैं कि लोगों को पीने के पानी के लिए कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ रहा है, इसके बावजूद उन्हें स्वच्छ पानी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। मजबूरी में ग्रामीण ऐसे जल स्रोतों का उपयोग कर रहे हैं, जिनसे जानवर भी पानी पीते हैं, जिससे बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।
जा मामला कांकेर जिले के मासपुर गांव का है, जहां ग्रामीण लंबे समय से पानी की गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं। गांव की महिलाएं दिन में दो बार करीब तीन किलोमीटर का दुर्गम पहाड़ी रास्ता तय कर एक छोटे से ठहरे हुए कुंड से पानी लाने को मजबूर हैं। इसी जल स्रोत का उपयोग जानवर भी करते हैं, जिसके कारण यह पानी पीने योग्य नहीं है और बच्चों के बीमार पड़ने की घटनाएं सामने आ रही हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि गांव में बिजली की सुविधा नहीं होने के कारण बोरवेल का उपयोग संभव नहीं हो पा रहा है। वर्षों पहले गांव में बिजली के खंभे लगाए गए थे, लेकिन अब तक विद्युत आपूर्ति शुरू नहीं हो सकी है। इसके चलते गांव के लोग अंधेरे में जीवन यापन करने को विवश हैं और पेयजल संकट भी बना हुआ है।
ग्रामीणों ने बताया कि बोरवेल और पानी की व्यवस्था के लिए कई बार संबंधित विभागों और अधिकारियों से गुहार लगाई गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। दुर्गम रास्तों के कारण पानी लाने के दौरान जान का जोखिम भी बना रहता है, फिर भी लोग मजबूरी में इस कार्य को अंजाम दे रहे हैं।
वहीं अधिकारियों का कहना है कि 15 जून तक गांव में जल आपूर्ति शुरू करने की व्यवस्था की जा रही है। उनका दावा है कि निर्धारित समय के भीतर ग्रामीणों को राहत मिल जाएगी। उल्लेखनीय है कि बस्तर क्षेत्र के कई गांव नक्सलवाद और विकास की कमी के कारण अब तक बुनियादी सुविधाओं से वंचित रहे हैं।

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