अग्निपथ योजना पर अड़ा भारत, नेपाली गोरखाओं की भर्ती पर गतिरोध बरकरार, ब्रिटेन खुश

भारतीय सेना में नेपाली गोरखा सैनिकों की भर्ती 2022 से स्थगित है। इस बीच भारत ने साफ किया है कि नेपाली गोरखाओं की भर्ती सिर्फ अग्निपथ योजना के जरिए ही की जाएगी। वहीं, नेपाल सरकार का कहना है कि वह अग्निपथ योजना का विरोध जारी रखेगी। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि नेपाली गोरखा भारत की जगह ब्रिटेन का रुख कर सकते हैं।

काठमांडू/एजेंसी। भारतीय सेना में नेपाली गोरखाओं की भर्ती को लेकर भारत और नेपाल के बीच जारी गतिरोध के चलते वर्षों पुरानी परंपरा पर संकट गहराता जा रहा है। भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि अब गोरखा सैनिकों की भर्ती केवल अग्निपथ योजना के तहत ही होगी, जबकि नेपाल सरकार अपने नागरिकों को इस योजना के अंतर्गत भर्ती होने की अनुमति देने को तैयार नहीं है।

नेपाल ने वर्ष 2022 में भारतीय सेना में गोरखाओं की भर्ती पर रोक लगा दी थी। तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने अग्निपथ योजना का विरोध करते हुए इसे त्रिपक्षीय समझौते (1947) की भावना के खिलाफ बताया था। यह समझौता भारत, नेपाल और ब्रिटेन के बीच हुआ था, जिसके तहत नेपाली नागरिकों की भर्ती भारतीय और ब्रिटिश सेनाओं में की जाती रही है। इसके बाद से पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ के कार्यकाल में भी यह रोक जारी रही और वर्तमान सरकार ने भी अपने रुख में कोई बदलाव नहीं किया है।

नेपाल का तर्क है कि अग्निपथ योजना के तहत चार वर्ष की सेवा और पेंशन प्रावधान का अभाव पारंपरिक भर्ती व्यवस्था के अनुरूप नहीं है। वहीं भारत ने इस आपत्ति को खारिज करते हुए कहा है कि सेना में भर्ती की वर्तमान नीति अग्निपथ योजना के अनुसार ही लागू रहेगी और इसमें कोई अपवाद नहीं होगा।

गौरतलब है कि नेपाली गोरखा सैनिकों की बहादुरी की पहचान विश्वभर में रही है। उनकी भर्ती की परंपरा वर्ष 1815 में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के समय से शुरू हुई थी और 2022 तक यह प्रक्रिया नियमित रूप से जारी रही। लेकिन अग्निपथ योजना लागू होने के बाद से यह मुद्दा दोनों देशों के बीच विवाद का कारण बन गया है।

अग्निपथ योजना के तहत सैनिकों की भर्ती चार वर्षों के लिए की जाती है, जिसमें से 25 प्रतिशत को आगे 15 वर्षों की सेवा के लिए रखा जाता है, जबकि शेष 75 प्रतिशत को लगभग 11.7 लाख रुपये के सेवा पैकेज के साथ सेवानिवृत्त किया जाता है। इसके अलावा सेवा अवधि के दौरान 48 लाख रुपये का बीमा कवरेज भी प्रदान किया जाता है।

इधर, ब्रिटिश सेना में नेपाली गोरखाओं की भर्ती लगातार जारी है। आजादी के बाद चार गोरखा रेजिमेंट ब्रिटिश सेना में स्थानांतरित की गई थीं, जिन्हें 1994 में मिलाकर ‘रॉयल गोरखा राइफल्स’ बनाया गया। हाल ही में ब्रिटेन ने ‘किंग्स गोरखा आर्टिलरी’ नामक नई यूनिट के गठन की घोषणा की है, जिसमें करीब 400 सैनिक शामिल किए जाएंगे। इसके पूरा होने के बाद नेपाली गोरखा सैनिकों की भर्ती के अवसर और बढ़ने की संभावना है।

इस पूरे मुद्दे पर अब नजरें नेपाल सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं, क्योंकि भारत अपने रुख पर स्पष्ट रूप से कायम है।

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