बागपत के महाभारतकालीन लाक्षागृह को बचाने की चुनौती, एएसआई के नोटिस के बावजूद अवैध निर्माण जारी
बागपत के बरनावा स्थित महाभारतकालीन लाक्षागृह के प्रतिबंधित क्षेत्र में अवैध निर्माण जारी है। एएसआई नोटिस के बाद भी काम नहीं रुकने से सवाल उठे हैं।

बागपत/उत्तर प्रदेश। महाभारतकालीन इतिहास से जुड़े बरनावा स्थित प्रसिद्ध लाक्षागृह पर इन दिनों अवैध निर्माण का खतरा मंडरा रहा है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा संरक्षित इस ऐतिहासिक स्थल के 100 मीटर प्रतिबंधित क्षेत्र में खुलेआम निर्माण कार्य किए जाने का मामला सामने आया है। हैरानी की बात यह है कि एएसआई मेरठ सर्किल की ओर से नोटिस जारी किए जाने के बावजूद निर्माण कार्य पर रोक नहीं लग पाई है।
एएसआई के नियमों के अनुसार किसी भी संरक्षित स्मारक के 100 मीटर के दायरे में किसी भी प्रकार का निर्माण पूरी तरह प्रतिबंधित होता है, जबकि 100 से 200 मीटर के क्षेत्र में निर्माण के लिए पूर्व अनुमति आवश्यक होती है। इसके बावजूद बरनावा क्षेत्र में इन नियमों की अनदेखी कर दुकानों और मकानों का निर्माण जारी रहने की शिकायतें मिल रही हैं।
बरनावा का लाक्षागृह महाभारत काल से जुड़ा एक महत्वपूर्ण पुरास्थल माना जाता है। वर्ष 1952 में हस्तिनापुर में हुए उत्खनन और बाद में बरनावा क्षेत्र के सर्वेक्षण के दौरान यहां चित्रित धूसर मृदभांड (पेंटेड ग्रे वेयर) प्राप्त हुए थे, जिन्हें प्राचीन सभ्यता का महत्वपूर्ण प्रमाण माना जाता है। इसके अलावा 10 जनवरी 2018 को एएसआई द्वारा कराई गई खुदाई में प्राचीन दीवारें, मानव कंकाल और पुरानी बस्ती के अवशेष मिलने से इस स्थल का ऐतिहासिक महत्व और बढ़ गया।
हिंडन और कृष्णा नदी के संगम क्षेत्र में स्थित यह टीला करीब 100 फीट ऊंचा और लगभग 30 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है। मान्यता है कि महाभारत काल में कौरवों ने पांडवों को जलाने के लिए यहां लाक्षागृह का निर्माण कराया था, हालांकि पांडव गुप्त सुरंग के माध्यम से बच निकलने में सफल रहे थे।
वरिष्ठ इतिहासकार डॉ. अमित राय जैन ने संरक्षित क्षेत्र में हो रहे निर्माण को गंभीर चिंता का विषय बताते हुए कहा कि इस संबंध में एएसआई के उच्च अधिकारियों को शिकायत भेजी गई है। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसी गतिविधियां देश की पुरातात्विक धरोहर को नुकसान पहुंचा सकती हैं।
एएसआई मेरठ सर्किल के संरक्षक सहायक राजेंद्र सिंह ने बताया कि नियमों का उल्लंघन करने वालों को नोटिस जारी किए गए हैं और जल्द ही स्थल का निरीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि दोषियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जाएगा।
लाक्षागृह न केवल एक ऐतिहासिक स्थल है, बल्कि भारतीय संस्कृति और विरासत का महत्वपूर्ण प्रतीक भी है। ऐसे में अवैध निर्माण और अतिक्रमण पर समय रहते रोक नहीं लगाई गई तो इस धरोहर को गंभीर क्षति पहुंचने की आशंका है। अब देखना होगा कि प्रशासन और एएसआई इस दिशा में कितनी प्रभावी कार्रवाई करते हैं।




