आस्था, इतिहास और वास्तुकला का संगम है जम्मू का पंजतीर्थी क्षेत्र
जम्मू का पंजतीर्थी क्षेत्र अपने नाम के अनुरूप पांच प्राचीन मंदिरों का संगम है, जो आस्था, इतिहास और वास्तुकला का प्रतीक हैं।

जम्मू/एजेंसी। मंदिरों के शहर के रूप में प्रसिद्ध जम्मू का हर इलाका अपनी समृद्ध धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत के लिए जाना जाता है। इन्हीं में से एक प्रमुख और व्यस्त क्षेत्र है ‘पंजतीर्थी’, जिसका नाम और पहचान यहां स्थित पांच प्राचीन मंदिरों से जुड़ी हुई है। स्थानीय निवासियों से लेकर पर्यटकों तक, यह नाम आस्था और इतिहास दोनों का प्रतीक बन चुका है।
‘पंजतीर्थी’ शब्द ‘पंज’ यानी पांच और ‘तीर्थ’ यानी पवित्र धार्मिक स्थल से मिलकर बना है। अर्थात, इस क्षेत्र में पांच प्रमुख मंदिरों की मौजूदगी के कारण इसे यह नाम दिया गया। ये मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि स्थापत्य कला के भी उत्कृष्ट उदाहरण माने जाते हैं।
पंजतीर्थी क्षेत्र में स्थित प्रमुख मंदिरों में राधे श्याम मंदिर (बिल्लू मंदिर) का विशेष स्थान है, जिसका निर्माण वर्ष 1839 में भाई चरणदास ने कराया था। बिल्लू पुजारी की दीर्घ सेवा के कारण यह मंदिर उनके नाम से भी प्रसिद्ध हो गया।
श्री सत्य नारायण मंदिर, जो भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को समर्पित है, महाराजा प्रताप सिंह के शासनकाल में निर्मित हुआ था और 200 वर्ष से अधिक पुराना है। इस मंदिर की विशेषता कमल पर विराजमान भगवान विष्णु और लक्ष्मी की दुर्लभ मूर्ति तथा दीवारों पर बनी बसोहली चित्रकला है।
इसके अलावा, सरदार अत्तार सिंह द्वारा 19वीं सदी में निर्मित ‘सरदारों का मंदिर’ अपनी डोगरा वास्तुकला के लिए जाना जाता है। यह मंदिर भगवान राम, सीता, लक्ष्मण और भगवान शिव को समर्पित है।
दाऊ मंदिर, भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम (दाऊ जी) को समर्पित है, जिसका निर्माण महाराजा रणवीर सिंह ने तवी नदी के तट पर कराया था। वहीं, गदाधर मंदिर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आराधना का प्रमुख केंद्र है, जिसका निर्माण महाराजा गुलाब सिंह द्वारा करवाया गया था। इसकी विशेषता यह है कि यह बिना गुम्बद के सामान्य इमारत की तरह दिखाई देता है।
पंजतीर्थी क्षेत्र में स्थित ‘बनवारी दास मंदिर’, जिसे स्थानीय लोग ‘बटमालू मंदिर’ के नाम से जानते हैं, को लेकर भी मान्यता है कि यह इस पवित्र समूह का हिस्सा रहा है।
धार्मिक आस्था, ऐतिहासिक महत्व और सांस्कृतिक विरासत को संजोए हुए पंजतीर्थी आज भी जम्मू की पहचान का एक अभिन्न हिस्सा बना हुआ है, जो श्रद्धालुओं और पर्यटकों को समान रूप से आकर्षित करता है।




