मालवीय नगर गेस्ट हाउस बना ‘मौत का जाल’, 6 कमरों की अनुमति लेकर बना डाले 20; प्रशासन की लापरवाही से 21 मौतें
दिल्ली की बहुमंजिला बिल्डिंग में अग्निकांड के बाद लोग अपनों को तलाश रहे हैं। उनकी आंखें नम हैं। उनका बस यही कहना है कि उनके परिवार के लोग मिल नहीं रहे। सब जले हुए हैं।

नई दिल्ली। दिल्ली में हुए अग्निकांड में सिर्फ राजधानी के लोगों ने अपनी जान नहीं गवाई, बल्कि दक्षिण अफ्रीका के सुदूर कांगो देश से अपने एक रिश्तेदार का इलाज कराने दिल्ली आई एक युवती भी दुर्घटना का शिकार बन गई। मृतक महिला की बहन ने रोते हुए बताया कि रेस्टोरेंट में लगी आग ने उसकी बहन को उससे हमेशा के लिए छीन लिया। ये तो सिर्फ एक परिवार की कहानी है। ऐसे न जाने कितने परिवारों ने अपने प्रियजनों को इस हादसे में खो दिया। अब तक 21 लोगों की मौत इस हादसे में हो चुकी है। सवाल वही है, जो इस तरह के हर हादसे के बाद होता है कि लापरवाही की भेंट चढ़ी इन 21 जिंदगियों का जिम्मेदार कौन है?
पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि जिस रेस्टोरेंट में आग लगी, उस बिल्डिंग में ही एक होटल में अवैध कमरे चल रहे थे। इस होटल को सिर्फ 6 कमरों की अनुमति मिली हुई थी, लेकिन नियमों को ताक पर रखकर पूरे 25 कमरों का होटल चलाया जा रहा था। फायर और सेफ्टी विभाग से एनओसी भी नहीं ली गई थी और सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इतने बड़े होटल में जाने और वहां से लौटने के लिए सिर्फ एक ही रास्ता था। इस हादसे में जान गंवाने वाले ज्यादातर लोग अफ्रीका या मध्य एशिया के हैं।
घटनास्थल से 40 से ज्यादा घायलों को बाहर निकालकर अस्पताल में भर्ती किया गया, जिनकी हालत गंभीर बनी हुई है। अब तक 21 लोगों की मौत जरूर हुई है, लेकिन घायलों की हालत देखने अंदाजा लगाया जा रहा है कि ये आंकड़ा और बढ़ सकता है। जिस होटल और रेस्टोरेंट में यह हादसा हुआ वह हौज रानी इलाके में स्थित ‘फ्लोरिश स्टे B&B’ के नाम से जाना जाता है। इसमें सुबह करीब 8:45 बजे आग लगी थी।
इस हादसे ने नियमों के पाल की कमियों को उजागर किया है। होटल अपनी क्षमता से कहीं ज्यादा मेहमानों को हैंडल कर रहा था और खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ा रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों और शुरुआती जांच के नतीजों से पता चलता है कि कई पीड़ितों की मौत दम घुटने से हुई, खासकर उन लोगों की जो बेसमेंट वाले हिस्से में फंस गए थे। बेसमेंट में अवैध कमरे चलाए जा रहे थे।
जांच में यह भी पता चला है कि इस प्रॉपर्टी को ‘बेड एंड ब्रेकफास्ट’ कैटेगरी के तहत सिर्फ छह कमरों की अनुमति मिली थी, लेकिन सूत्रों के अनुसार लगभग 25 कमरे चला रही थी। इस इमारत में एक बेसमेंट, ग्राउंड फ्लोर और पांच ऊपरी मंजिलें हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार आग इमारत की पहली मंजिल पर लगी थी, हालांकि आग लगने के सही कारण की अभी भी जांच चल रही है। दिल्ली पुलिस के सूत्रों के अनुसार होटल में आने-जाने का सिर्फ एक ही रास्ता था। दिल्ली पुलिस ने इस मामले में अज्ञात लोगों के खिलाफ ‘गैर-इरादतन हत्या’ का केस दर्ज कर लिया है। इस बात की जांच की जा रही है कि क्या होटल में आग से बचाव के लिए जरूरी उपकरण मौजूद थे।




