मानकों को ताक पर रखकर संचालित हो रहा इंद्रप्रकाश पब्लिक स्कूल, ग्रामीणों ने लगाए गंभीर आरोप
**छोटा समाचार सार:** ग्रामीण क्षेत्र के एक स्कूल में गंभीर लापरवाही सामने आई है, जहाँ टूटी सड़क, खराब स्कूल वैन और बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण बच्चों की सुरक्षा खतरे में है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से जल्द कार्रवाई की मांग की है।

संवाददाता/सत्येंद्र शुक्ला
फतेहपुर/उत्तर प्रदेश। जिले के विजयीपुर क्षेत्र के शहाबपुर गांव स्थित इंद्रप्रकाश पब्लिक स्कूल (आईपीएस) इन दिनों गंभीर अनियमितताओं को लेकर चर्चा में है। स्थानीय ग्रामीणों ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर विद्यालय प्रबंधन पर शिक्षा विभाग द्वारा निर्धारित मानकों की खुलेआम अनदेखी करने और छात्रों की सुरक्षा एवं बुनियादी सुविधाओं के साथ खिलवाड़ करने के आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि विद्यालय में आवश्यक संसाधनों का अभाव होने के बावजूद अभिभावकों से मनमाने ढंग से मोटी फीस वसूली जा रही है, जिससे क्षेत्र में रोष का माहौल बना हुआ है।
ग्रामीणों के अनुसार विद्यालय परिसर में छात्रों के लिए पर्याप्त और उपयोगी शौचालयों की व्यवस्था नहीं है, जिससे विशेषकर छोटे बच्चों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ता है। कई कक्षाओं में पंखों का अभाव है, जिसके कारण गर्मी के मौसम में बच्चों के लिए पढ़ाई करना कठिन हो जाता है। इसके अलावा विद्यालय परिसर में साफ-सफाई की समुचित व्यवस्था नहीं होने से संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बना रहता है। स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं बताई जा रही है, जो बच्चों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि विद्यालय में प्रशिक्षित और योग्य शिक्षकों की कमी है तथा कई कक्षाओं का संचालन ऐसे व्यक्तियों द्वारा किया जा रहा है जो निर्धारित शैक्षणिक योग्यता पूरी नहीं करते। इससे छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है और उनके भविष्य पर नकारात्मक असर पड़ रहा है।
विद्यालय के परिवहन प्रबंधन को लेकर भी अभिभावकों ने गंभीर चिंता जताई है। उनका कहना है कि बच्चों को लाने-ले जाने के लिए पुराने और जर्जर वाहनों का उपयोग किया जा रहा है, जिनमें सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। इन वाहनों की फिटनेस और आवश्यक दस्तावेजों की वैधता पर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं। अभिभावकों का कहना है कि किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है, लेकिन संबंधित विभाग इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
इसके अतिरिक्त यह भी आरोप है कि विद्यालय को केवल कक्षा 8 तक की मान्यता प्राप्त है, इसके बावजूद इंटरमीडिएट तक के छात्रों का प्रवेश लिया जा रहा है और उनकी कक्षाएं किसी अन्य विद्यालय से संबद्ध बताकर संचालित की जा रही हैं, जो नियमों के विरुद्ध है। इस प्रकार की गतिविधियां शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न खड़ा करती हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने इस संबंध में कई बार संबंधित अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे उनमें आक्रोश व्याप्त है और वे शीघ्र जांच एवं कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
खंड शिक्षा अधिकारी रजनीश कुमार श्रीवास्तव ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कहा कि शिकायत की जांच कराई जाएगी और यदि किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। वहीं वाहनों के संबंध में एआरटीओ प्रतीक मिश्रा ने भी कहा कि पूरे प्रकरण की जांच कराई जाएगी और तथ्यों के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।




