ईरान में फिर बरसेंगे इजरायली मिसाइल और ड्रोन? नेतन्याहू का ‘युद्ध प्लान’ तैयार, अलर्ट पर सेना

मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ा है क्योंकि इजरायल ने ईरान के खिलाफ संभावित युद्ध के लिए सेना को तैयार रहने का आदेश दिया है। यह कदम अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर वार्ता विफल होने के बाद आया है।
अंतर्राष्ट्रीय डेस्क। मिडिल ईस्ट में तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। इजरायल ने अपनी सेना को ईरान के खिलाफ संभावित युद्ध के लिए तैयार रहने का आदेश दिया है। यह कदम उस समय उठाया गया है जब अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर को लेकर हुई बातचीत पूरी तरह विफल हो गई। रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायल के सेना प्रमुख ने स्पष्ट रूप से अपने सैनिकों को आदेश दिया है कि वे ईरान के साथ फिर से युद्ध शुरू होने की स्थिति के लिए तैयार रहें। यह निर्देश ऐसे समय आया है जब क्षेत्र में हालात पहले से ही बेहद संवेदनशील बने हुए हैं।
अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध रोकने के लिए पाकिस्तान में उच्च स्तरीय बातचीत हुई थी। करीब 21 घंटे तक चली इस मैराथन बैठक में अमेरिका की ओर से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के नेतृत्व में टीम शामिल थी, जबकि ईरान की ओर से संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने नेतृत्व किया। हालांकि, लंबी बातचीत के बावजूद दोनों पक्ष किसी समझौते पर नहीं पहुंच सके। मतभेद इतने गहरे थे कि आखिरकार वार्ता बिना किसी नतीजे के खत्म हो गई।
बातचीत में सबसे बड़ा विवाद होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर रहा। जहाजों की आवाजाही और इस क्षेत्र पर नियंत्रण को लेकर दोनों पक्षों में सहमति नहीं बन पाई। इसके अलावा ईरान ने साफ कहा कि किसी भी समझौते के लिए अमेरिका को उसके “वैध अधिकारों और हितों” को स्वीकार करना होगा। इसी सख्त रुख के चलते बातचीत आगे नहीं बढ़ सकी।
इजरायल की सैन्य तैयारी और बातचीत फेल होने का असर अब वैश्विक बाजारों पर भी दिखने लगा है। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है और सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है। साथ ही, निवेशकों ने सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने की ओर रुख किया है, जिससे सोने के दाम भी बढ़ गए हैं। डॉलर पर भी इसका दबाव देखा जा रहा है।
इस वैश्विक तनाव का असर भारतीय बाजारों पर भी पड़ा है। विदेशी निवेशकों ने बड़ी मात्रा में शेयर बाजार से पैसा निकाला है। रिपोर्ट के मुताबिक, युद्ध शुरू होने के बाद से विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से करीब 1.6 लाख करोड़ रुपये निकाल लिए हैं।



